प्रदेश सरकार ने 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगे की जांच दोबारा कराने का आदेश दिया है। शासन ने इसकेलिए पूर्व डीजीपी अतुल के नेतृत्व में एसआईटी गठित की है जो 6 माह के अंदर जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी।
प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि उच्चतम न्यायालय में दाखिल याचिका मनजीत सिंह व अन्य बनाम भारत सरकार व अन्य में सिख दंगों की जांच दोबारा कराए जाने की मांग की गई थी।
इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि इस मामले की जांच विशेष जांच दल से कराई जाए। पूर्व डीजीपी अतुल की अध्यक्षता में गठित इस विशेष अनुसंधान दल में सेवानिवृत्त जिला जज सुभाष चंद्र अग्रवाल, सेवा निवृत्त अपर निदेशक अभियोजन सुभाष चंद्र अग्रवाल को बतौर सदस्य व कानपुर के एसएसपी को सदस्य सचिव बनाया गया है।
शासन की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि साल 1984 में कानपुर हुए सिख दंगों के संबंध में दर्ज एफआईआर जिनमें अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई हो की दोबारा पड़ताल कर ली जाए।
पड़ताल में जघन्य अपराध से संबंधित मामलों को प्राथमिकता प्रदान की जाए। यदि किसी मामले में औचित्य पाया जाए तो सीआरपीसी की धारा 173 (8) के तहत आगे की विवेचना एसआईटी द्वारा की जाए।
प्रमुख सचिव गृह की ओर से यह भी कहा गया है कि जिन मामलों में न्यायालय ने अभियुक्तों को दोषमुक्त करार दिए गए हों, उनका भी परीक्षण कर लिया जाए। इसमें भी जघन्य अपराध के मामलों को वरीयता दी जाए।
परीक्षण के बाद अगर कोई ऐसा मामला पाया जाता है जिसमें औचित्य के होते हुए भी अपील या रिट दाखिल नहीं की गई है, तो ऐसे मामले में सक्षम न्यायालय में अपील दाखिल किए जाने की संस्तुति उपलब्ध कराई जाए।
निर्देश में यह भी कहा गया है कि एसआईटी द्वारा विवेचना व अन्य कार्यों के लिए मांगे जाने पर आवश्यकतानुसार इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर व अन्य कर्मचारी व अभियोजन अधिकारी डीजीपी स्तर से संबद्घ किए जाएंगे।