बाल श्रम निषेध दिवस पर शहर भर में कई संगठनों द्वारा जागरूकता अभियान चलाया गया।
इस अवसर पर खुद बच्चों ने बाल श्रम का विरोध किया और लोगों से जीने का अधिकार मांगा। नुक्कड़ सभाओं के साथ जागरूकता रैली भी निकाली गई।
चाइल्डलाइन की तरफ से चारबाग के नत्था चौराहे से नाका चौराहे तक रैली निकाली गई। साथ ही चाइल्डलाइन टीम ने बालश्रम पर नुक्कड़ नाटक का भी मंचन किया।
जिसका संदेश था की, बालश्रम अब तो रोक दो बच्चों को जीने का अधिकार दो। मौके पर चाइल्डलाइन के केंद्र समन्वयक दिलीप वर्मा, सहायक श्रमायुक्त जीएन श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।
वहीं, सुरभी संस्था की ओर से आलमबाग के समर बिहार सेंट्रल पार्क में ‘हम बच्चों की आवाज’ नाटक का मंचन किया गया।
इसके जरिए बाल मजदूरी की स्थिति से लोगों को अवगत कराया गया। उधर, हम कदम संस्था ने भी जागरूकता रैली निकाली।
रैली आईआईएम तिराहे से भिठोली रेलवे क्रॉसिंग व सीतापुर रोड पहुंच कर संपन्न हुई। इसके अलावा इंटीगरल विश्वविद्यालय में बाल श्रम के खिलाफ विश्व बाल दिवस पर मंथन किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस डब्ल्यू अख्तर ने कहा कि बच्चे होटल और रेस्तरां में काम कर रहे हैं या घरेलू नौकर हैं।
इस तरह के शोषण सिर्फ एक रणनीति से नहीं रोके जा सकते, हमें चाहिए कि इसके मूल कारणों का पता करें।