राजधानी के कुछ सरकारी अस्पतालों में एंटीबॉयोटिक दवाओं का संकट हो गया है। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों को बाहर से महंगी एंटीबॉयोटिक दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
वह कुछ मरीजों को वैकल्पिक दवाओं के सहारे काम चलाना पड़ रहा है। सिविल अस्पताल, बलरामपुर अस्पताल समेत आठ बाल महिला चिकित्सालयों में एंटीबॉयोटिक दवाओं की कमी हो गई है।
अस्पताल में जरूरी दवाएं न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं गंभीर मरीज एंटीबायोटिक दवाएं बाहर से खरीदने को मजबूर हैं।
सूत्रों के मुताबिक सिविल अस्पताल में एमॉक्सी और सिप्लॉक्स 500 एमजी एंटीबायोटिक दवा की आपूर्ति काफी समय से बंद है।
अगर किसी गंभीर मरीज को कोई डॉक्टर एंटीबॉयोटिक दवा लिखता है तो उसे एक-दो दिन की ही दवा दे दी जाती है। जबकि कुछ मरीजों को बिना दवा दिए ही लौटाया जा रहा है।
यही समस्या बलरामपुर और लोहिया अस्पताल में भी है। यहां भी जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।
इसी तरह आठ बाल महिला चिकित्सालयों में भी जरूरी दवाओं का टोटा है। यहां गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली एंटीबॉयोटिक टीडीलॉन और डॉक्सीसाइक्लीन एंटीबॉयोटिक दवा की आपूर्ति काफी समय से ठप है।
वैकल्पिक दवाओं के भरोसे इलाज
अस्पतालों में एंटीबायोटिक दवाओं के संकट के चलते डॉक्टर मरीजों को वैकल्पिक दवाएं लिख रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रमुख दवाओं की आपूर्ति बंद होने से मरीजों को कई दवाएं मिलाकर दी जा रही हैं जिससे एंटीबॉयोटिक दवाओं का डोज पूरा किया जा सके।
विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ समय तक तो ठीक है लेकिन अगर इन दवाओं की डोज काफी समय तक दी जाए तो मरीज को इसके साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।