ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से बसंत कुंज) और रिंग लाइन मेट्रो की टेक्नोफिजिबिलिटी रिपोर्ट अगले नौ महीने में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन बनाने का दावा किया था।
मगर जुलाई से लेकर अब तक एलएमआरसी ने डीएमआरसी को इस संबंध में कोई भुगतान नहीं किया था। पिछले सप्ताह 30 फीसदी अग्रिम भुगतान किया गया है।
56 किलोमीटर के इस रूट की रिपोर्ट बनाने के लिए डीएमआरसी प्रदेश सरकार से 2.80 करोड़ रुपये लेगा। इसके लिए हाई पावर कमेटी ने डीएमआरसी को इजाजत भी दे दी थी।
डीएमआरसी की ओर से कहा गया है कि वे इसकी रिपोर्ट अगले नौ महीने में मेट्रो सेल के हवाले कर देंगे। जिसके बाद में इस पर सरकार अपना निर्णय ले सकेगी।
इससे अधिक की स्टडी कराने के लिए प्रत्येक किलोमीटर के हिसाब से पांच लाख रुपये का भुगतान डीएमआरसी को करना होगा।
हवा में मेट्रो का शिलान्यास
मेट्रो रेल परियोजना में विलंब बढ़ता जा रहा है। सरकार की घोषणा थी कि दिसंबर में परियोजना का शिलान्यास होगा, मगर आचार संहिता के सिर पर होने के बावजूद अब तक टर्न-की के आधार पर कौन सी कंपनी मेट्रो निर्माण करेगी, यह फैसला नहीं हो सका है।
बस अनौपचारिक तौर पर कहा जा रहा है कि डीएमआरसी को यह काम दिया गया है। टर्न-की पर काम कराने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के सामने जो ऑफर डॉक्यूमेंट्स प्रस्तुत किया जाना है।
दो महीना बीतने के बावजूद अब तक यह डॉक्यूमेंट नहीं तैयार किया जा सका है। कंपनी तय करने की कोई भी घोषणा अब तक नहीं की गई है।
ऐसे में शिलान्यास का मामला फंसता हुआ नजर आ रहा है। हाईपावर कमेटी टर्न-की के आधार पर मेट्रो के निर्माण का फैसला दिसंबर की मीटिंग कर चुकी है।
इस मीटिंग में प्रमुख सचिव आवास सदाकांत को जिम्मेदारी दी गई थी कि, वे परीक्षण कर के इस डॉक्यूमेंट को ओके कर दें।
मगर अब तक इस दिशा में कोई खास कदम नहीं उठाया गया है। इस संबंध में एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक राजीव अग्रवाल भी कोई बातचीत करने को तैयार नहीं हैं।