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भूमि अधिग्रहण नीति पर अब सपा के पाले में गेंद

Sun, 13 Oct 2013 10:01 PM IST
महेंद्र तिवारी/लखनऊ
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सूबे की सपा सरकार को अपने चुनाव घोषणा पत्र में किए गए वादे के मुताबिक नई भूमि अधिग्रहण नीति तैयार करने की कार्यवाही आगे बढ़ाने का रास्ता मिल गया है।
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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संसद के दोनों सदनों में पारित नए भूमि अधिग्रहण विधेयक का सरलीकृत प्रस्तुतीकरण व विधेयक को लेकर बार-बार पूछे जाने वाले सवालों का जवाब भेज दिया है।

मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस पर कार्यवाही का निर्देश दिया है। सपा सरकार के सामने आगामी लोकसभा चुनाव के पहले अपने इस प्रमुख वादे को पूरा करने की चुनौती है।
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संसद से भूमि अधिग्रहण कानून पास होने के बाद प्रदेश में इसको लेकर सियासी गर्माहट बढ़ गई है। जयराम रमेश ने पिछले दिनों यहां आकर इस विधेयक को बड़ी कामयाबी के रूप में प्रचारित किया था।

उन्होंने सपा घोषणापत्र के वादे की ओर विशेष तौर से संकेत करते हुए साफ किया था कि केंद्रीय कानून राज्य सरकारों को किसानों को इससे अधिक सुविधाएं देने की तो छूट देता है, मगर इससे कम नहीं।

केंद्रीय कानून में जहां किसानों को दो से चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान है, वहीं सपा ने अपने घोषणापत्र में छह गुना मुआवजे का वादा कर रखा है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी अपनी सभाओं में भूमि अधिग्रहण कानून को किसानों को दिए गए महत्वपूर्ण अधिकार के रूप में पेश कर रहे हैं।

ऐसे में प्रदेश सरकार के सामने लोकसभा चुनाव से पहले अपने वादे के हिसाब से नई भूमि अधिग्रहण नीति तैयार कर लागू करना किसी चुनौती से कम नहीं है।

जयराम ने मुख्यमंत्री को भूमि अधिग्रहण विधेयक से जुड़े दस्तावेज भेजते हुए उम्मीद जताई है कि ये दस्तावेज उनके लिए उपयोगी साबित होंगे।

प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग ने केंद्रीय मंत्री द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए दस्तावेज को मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को जरूरी कार्यवाही के लिए भेज दिया है।

शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि चुनाव पूर्व यदि प्रदेश को नई भूमि अधिग्रहण नीति तैयार करनी है तो प्रदेश सरकार को इसके लिए गठित मंत्रिसमूह की कार्यवाही को तत्काल आगे बढ़ाना होगा।

हालांकि कई औद्योगिक घराने सपा के घोषणापत्र के मुताबिक मुआवजा देने की व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे उद्योगों के लिए जमीन की व्यवस्था बेहद मुश्किल हो जाएगी।
 
मंत्रिसमूह के सामने लंबित है नई नीति की कार्यवाही
प्रदेश सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण नीति केलिए गठित मंत्रिसमूह में स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन के साथ तत्कालीन राजस्व मंत्री अंबिका चौधरी व श्रम मंत्री वकार अहमद शामिल थे।

चौधरी का विभाग बदल चुका है और शाह लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। ऐसे में मंत्रिसमूह की कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए इस संबंध में नए सिरे से निर्णय लेना होगा।

केंद्रीय कानून में प्रावधान
1) बंजर जमीन न मिलने पर पांच फीसदी बहु फसली खेती वाली जमीन केअधिग्रहण का प्रावधान, समय सीमा तय।
2) भूमि अधिग्रहण से पहले किसान की मंजूरी लेना जरूरी। ग्रामीण इलाकों में जमीन के लिए बाजार मूल्य से चार गुना और शहरी क्षेत्रों में यह मुआवजा दोगुना अधिक होगा।
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3) अधिग्रहीत भूमि पर पांच वर्षों में काम शुरू न होने पर किसान जमीन वापस ले सकेंगे या राज्य सरकार के भूमि बैंक में जमा हो जाएगी।  
4) अधिग्रहण के कारण आजीविका खोने वाले को 12 महीने के लिए प्रति परिवार तीन हजार रुपये प्रतिमाह भत्ता, 50 हजार का पुनर्स्थापना भत्ता, प्रभावित परिवार को ग्रामीण क्षेत्र में 150 वर्ग मीटर में और शहरी क्षेत्र में 50 वर्गमीटर में मकान बनाकर दिया जाएगा।

 ...और सपा का वादा
1) किसानों को दो फसल देने वाली जमीन का उद्योग एवं बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए अधिग्रहण पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा।
2) किसी स्थिति में अधिग्रहण होना है तो किसान की स्वीकृति से ही होगा। अधिग्रहण का मूल्य सर्किल रेट से छह गुना होगा।
3) जिस उद्देश्य से भूमि अधिग्रहीत होगी यदि तीन वर्ष तक वह काम नहीं हुआ तो किसानों की जमीन वापस करनी होगी।
4) किसान के क्षेत्र में उद्योग निर्माण होना है तो किसान परिवार के एक युवक को नौकरी और परिवार के बुजुर्ग दंपती को आजीवन पेंशन का इंतजाम करना होगा।
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