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बिल्डर्स का कारनामा: अंसल ने डुप्लेक्स योजना को बना दिया बहुमंजिला

Fri, 15 Sep 2017 04:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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डेमो प‌िक
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सुशांत गोल्फ सिटी में अंसल बिल्डर्स का एक और कारनामा सामने आया है। बिल्डर ने सेक्टर सी में भरोसा योजना में एलआईजी आवास में डुप्लेक्स फ्लैट बनाने की जगह बहुमंजिला प्रोजेक्ट लांच कर दिया।
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2009 में जिस योजना में बुकिंग डुप्लेक्स फ्लैट के लिए की गई, उसी योजना को बहुमंजिला बनाकर चार साल के बाद दुबारा से लांच कर बुकिंग खोल दी गई। 

अंसल के ऐसे सैकड़ों आवंटियों में शामिल गौरव बहादुर व वंदना श्रीवास्तव निवासी न्यू तिलकनगर का कहना है कि 2009 में जब फ्लैट बुक कराया, उस समय तीन साल में कब्जा दिए जाने की बात कही गई।

यह आवास जी प्लस वन (डुप्लेक्स) के रूप में बनाए जाने थे। बिल्डर ने गौरव को सेक्टर सी में सी/5/0150/जीएफ नंबर के भूतल का आवास आवंटित कर दिया।

बेटे के साथ रहने के लिए उद्देश्य से उनकी मां सावित्री श्रीवास्तव ने भी एक आवास बुक कराया। उन्हें बिल्डर ने पहले तल का आवास आवंटित कर दिया।

गौरव का कहना है कि 2013 में अचानक से बिल्डर ने योजना ही बदल दी। डुप्लेक्स की जगह वहां बहुमंजिला प्रोजेक्ट लांच कर दिया। इसकी सूचना भी हमें 2014 में दी गई।
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आवास का साइज भी 56 वर्गमी से घटाकर 36 वर्गमी ही रह गया। इसके उलट आवास की कीमत भी काफी बढ़ा दी गई। यह उस समय हुआ, जबकि हम एलआईसी से लोन लेकर पूरा पैसा जमा कर चुके थे।

बिल्डर को लीगल नोटिस भी भेजा, लेकिन कोई जबाव नहीं मिला। इसके बाद जिला उपभोक्ता फोरम में हम केस फाइल कर चुके हैं।

पहले बुलाया फिर टरकाते रहे

बृहस्पतिवार को आवंटियों को अंसल कार्यालय में बुलाया गया था। यहां उन्हें कभी अधिकारियों के बैठक में होने और कभी लंच शुरू हो जाने के नाम पर बिठाकर रखा गया।

गौरव ने बताया कि कोई वहां सुनने के लिए तैयार नहीं था। ऐसे में अब एक एप्लीकेशन हमने अपना पैसा रिफंड करने के लिए दी है। हमने उनसे 15 प्रतिशत ब्याज से पैसा वापस मांगा है। वहीं बिल्डर का स्टाफ 10 प्रतिशत ब्याज देने की बात कर रहा है।
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एलडीए के अधिकारी साधे रहे चुप्पी

बहुमंजिला योजना लांच करने के बाद डुप्लेक्स वाले आवासों की जगह नई बुकिंग बिल्डर ने शुरू कर दी। इसकी लॉटरी 2015 में खुद एलडीए की निगरानी में कराई गई।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि जब आवंटियों को आवास आवंटित हो चुके थे। इसके बाद प्रोजेक्ट में बदलाव करने की अनुमति एलडीए ने कैसे दी? इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जांच होकर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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