एपीआई अंसल में गरीब आवासों की आवंटन विसंगतियों को दूर करने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण नए सिरे से निर्देश जारी करेगा।
कंपनी ने 6000 वेतन वालों से 9025 रुपए और 12000 रुपए वेतन वालों से मकानों की किस्त 16000 रुपए से अधिक मांगी है।
इस संबंध में शासन ने उन 100 आवासों की रिपोर्ट तलब की है, जिनमें से 10 की चाभी खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आवंटियों को भेंट करेंगे।
शासन बहुत जल्द ही इन नए आवासों के संबंध में भी एलडीए से रिपोर्ट तलब करेगा। जिसमें शासन की नीति और एपीआई द्वारा प्रस्तुत की गई आवंटन नीति दोनों की जानकारी दी जाएगी।
एपीआई ने अपनी सुल्तानपुर रोड स्थित हाइटेक टाउनशिप में 4468 फ्लैटों की स्कीम पिछले दिनों लांच की है। इस स्कीम में 2000 ईडब्ल्यूएस और 2468 एलआईजी फ्लैट बनाए जाने की तैयारी है।
ईडब्ल्यूएस की कीमत 3.25 लाख रुपए और एलआईजी की कीमत 5.85 लाख रुपए है। दोनों स्कीमों के लिए क्रमश: 10 और 20 हजार रुपए पंजीकरण राशि जमा कराई जा रही है।
ईडब्ल्यूएस के आवंटियों के लिए नियम है कि, वे 36 महीने में ये सारे रुपए जमा कर दें। मगर आय सीमा है, छह हजार रुपए। इसका अर्थ है कि, जो छह हजार रुपए महीना कमाता है, वह 9025 रुपए महीना जमा करे।
इसी तरह से एलआईजी में आय सीमा है, 12000 रुपए मगर 5.85 लाख रुपए वाले फ्लैट के लिए हर माह 16250 रुपए जमा करने होंगे।
अगर होम लोन की बात की जाए तो कोई बैंक छह हजार रुपए वेतन वाले व्यक्ति को तीन लाख रुपए और 12000 वेतन वाले को 5 लाख रुपए लोन देने को राजी नहीं होगी।
अगर राजी भी हो गई तो किस्त क्रमश तीन हजार रुपए और पांच हजार रुपए होगी। ऐसे में इतने कम वेतन वाला व्यक्ति अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करेगा, इस सवाल का जवाब नहीं है।
शासन की नीति के हिसाब से इस तरह के भवनों के लिए एजेंसी को 15 साल की किस्तें बना कर वसूल करनी चाहिए।
100 आवासों के लिए तलब की रिपोर्ट
आवास विभाग ने प्राधिकरण ने उन 100 आवासों के संबंध में रिपोर्ट तलब की है, जिनका निर्माण पूरा हो चुका है। जबकि, आवंटन लगभग दो साल पहले अंसल ने किए थे।
प्राधिकरण से पूछा गया है कि, क्या उन आवासों के आवंटन में शासन की नीतियों का पालन किया गया था। जिसमें जवाब में एलडीए ने कहा कि, पूर्व में जिन आवासों का आवंटन किया गया था, उनमें शासन की नीतियों का पालन हुआ था। इसके बाद में अब शासन इन नए आवासों के संबंध में भी एलडीए से रिपोर्ट मांगेंगा।
एपीआई अंसल जिन आवासों का आवंटन करने जा रहा है, उसमें आवंटन और लाटरी की प्रक्रिया शासकीय नियमों के तहत की जाएगी। वह चाहें पंजीकरण हो या किस्तों की व्यवस्था। इस संबंध में कंपनी को निर्देशित कर दिया गया है।
अष्टभुजा प्रसाद तिवारी, उपाध्यक्ष, लविप्रा