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Lucknow News: एक और फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार, 35 हिरासत में

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लखनऊ। विभूतिखंड पुलिस ने बुधवार देर रात अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले एक और फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। एक फ्लैट से गिरोह के सरगना व तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनसे मिली जानकारी के बाद नेपाल व विभिन्न राज्यों के रहने वाले 35 अन्य लोगों को हिरासत में लिया है। आरोपी ठगी के लिए एप्पल का फर्जी कस्टमर सपोर्ट नंबर का इस्तेमाल कर रहे थे।
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डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा ने बताया कि बुधवार रात इंस्पेक्टर विभूतिखंड उपेंद्र सिंह को साइबर हाइट बिल्डिंग के चौथे तल पर फ्लैट नंबर 420-ए में फर्जी कॉल सेंटर के संचालन की सूचना मिली। रात करीब तीन बजे वह पुलिस फोर्स के साथ फ्लैट पर पहुंचे। वहां उन्हें गिरोह का मास्टरमाइंड प्रतापगढ़ के देवासर में गांव संग्रामगंज का रहने वाला सूरज त्रिपाठी, उसका फुफेरा भाई विवेक पांडेय, मामा राहुल त्रिपाठी और मुंबई के नाला सोपारा का रहने वाला आकाश अरुण दत्ता मिला। आरोपियों में सूरज बीए पास है और वह कॉल सेंटर का मालिक है। विवेक ने पॉलीटेक्निक से डिप्लोमा किया है और सेंटर का प्रबंधक है। राहुल डाॅयलर हैं। आकाश वीओआईपी सिस्टम का संचालक है।

एप्पल का फर्जी कस्टमर सपोर्ट नंबर बनाया
पूछताछ में सूरज ने बताया है कि आकाश ने फर्जी एप्पल कस्टमर सपोर्ट नंबर 0008001009009 बनाया था। उसी ने गूगल पर भुगतान कर इस फर्जी नंबर को प्रमोट कराया था। अमेरिकी नागरिक गूगल पर दर्शाए गए फर्जी नंबर पर कॉल करते थे तो आकाश उसे वीओआईपी सिस्टम के जरिये कॉल सेंटर तक पहुंचाता था। फिर विवेक डाॅलयर की मदद से अमेरिकी नागरिक का डेटा वेरीफाई करता था, जिसके बाद उन्हें डरा धमका कर रकम की उगाही की जाती थी। आरोपी छह माह से कॉल सेंटर चला रहे थे। अब तक ये गिरोह करीब दस करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है।
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एजेंटों को नहीं थी ठगी की जानकारी
पूछताछ में सूरज ने बताया कि नेपाल और विभिन्न राज्यों में बैठे उनके एजेंट को ठगी की जानकारी नहीं होती थी। उन्हें सिर्फ यह बताया गया था कि वे अमेरिका की एक नामी कंपनी की कस्टमर सपोर्ट सेवा में काम करते हैं। इसके लिए उन्हें भुगतान भी किया जाता था। डीसीपी ने बताया कि चारों की गिरफ्तारी के बाद कॉल सेंटर के लिए काम करने वाले 10 एजेंटों को उत्तराखंड, महाराष्ट्र से नौ, गुजरात और नागालैंड से तीन-तीन, असम व मणिपुर से दो-दो, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, त्रिपुरा, मध्यप्रदेश, उप्र व नेपाल से एक-एक एजेंट को हिरासत में लिया गया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। कार्रवाई में चिनहट और बीबीडी थाने की पुलिस का भी योगदान रहा।


जानिए क्या होता है वीओआईपी
वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) ऐसी तकनीक है जो इंटरनेट कनेक्शन का उपयोग करके वॉयस कॉल करने की अनुमति देती है। यह आपकी आवाज को डिजिटल डेटा पैकेट में बदलकर इंटरनेट के माध्यम से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा देती है।
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