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अनूप की 'लागी लग्न' पर मुग्ध हुआ शहर

Thu, 09 Oct 2014 10:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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तबले, गिटार और हारमोनियम की संगत संग बुधवार की शाम भजन सम्राट अनूप जलोटा ने यादगार बनाई। कभी भजनों संग तो कभी गजलों संग अपने चाहने वालों का दिल खुश कर तालियां लूटी।
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सरगम कल्चरल सोसाइटी की ओर से दिवंगत सिन्नू महाराज नृत्याचार्य की याद में सजे पांचवें आयोजन को भजन सम्राट की अदाओं ने यादगार बनाया। गोमतीनगर के संत गाडगे जी प्रेक्षागृह में हुए रंग दे चुनरिया.. को सुनने के लिए हॉल भी खचाखच भरा रहा।

दुर्गा स्तुति और आराधना नृत्य पर प्रस्तुति के बाद भजन सम्राट ने शाम की शुरुआत ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन... से की।

भजन खत्म हुआ तालियां गूंजी तो मन्ना डे का जिक्र छिड़ने पर उनके गाये कस्में वादे प्यार वफा सब बातें हैं बातों का क्या... सुनाया।

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किसकी जुर्रत जो हमसे लखनऊ छुडा़ए..

सवा घंटे से भी अधिक समय से मंच से भजनों की सरिता बहाने के दौरान लोगों से रूबरू होते रहे भजन सम्राट ने अपनी हाजिरजवाबी से भी दिल जीता।

कार्यक्रम पर लोगों के हम फिदा-ए-लखनऊ संवाद पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि है किसमें जुर्रत जो हमसे छुड़ाये लखनऊ... से दिल जीता।

मंच से गाने के दौरान अपने चाहने वालों से गायन में संगत करवा रहे अनूप ने सुरों को साधने की कोशिश के बीच वाय दिस कोलावरी दी... सुनाकर माहौल में ठहाके गुंजवाये।

हारमोनियम की बढ़ती बीट्स पर मेरे मन में राम तन में राम, रोम रोम में राम रे... भजन पर ही उनकी गिटार संग जुगलबंदी ने मन मोह लिया।

गजलों की फरमाइश हुई तो उन्हें जगजीत याद आए और पूरे हॉल में होंठों से छू लो तुम... की छटा बिखर गई।

गजलों की महफिल को जवां किया उनकी गाई एक और गजल तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छिपा रहे हो... ने।

उन्होंने अच्युतं केशवम्, कृष्ण दामोदरं... सुनाने के बाद ही विदाई ली। तबले पर रत्नेश मिश्रा, गिटार पर राकेश और गायन में कंचन ने संगत दी।
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