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UP News: दो विभागों के बीच फंसी MOCH की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट,  मुख्य सचिव ने ऑनलाइन एसीआर के दिए आदेश

Mon, 12 Jan 2026 03:36 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी में दो विभागों के बीच MOCH की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट फंस गई है। मुख्य सचिव ने अनिवार्य रूप से ऑनलाइन एसीआर के आदेश दिए हैं। आगे पढ़ें पूरा अपडेट...
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Demo - फोटो : Istock
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में कार्यरत चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य (एमओसीएच) मानव संपदा पोर्टल पर अपनी ऑनलाइन वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट (एसीआर) नहीं भर पा रहे हैं। इसका कारण यह है कि उनकी नियुक्ति आयुष विभाग के अंतर्गत हुई है, जबकि वे कार्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन कर रहे हैं। लंबे समय से एमओसीएच चिकित्साधिकारी स्वयं को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में समायोजित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन दोनों विभागों के बीच समन्वय के अभाव में मामला अधर में लटका हुआ है।

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वर्ष 2023-24 से शासन ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियां मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन भरना अनिवार्य कर दिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि एसीआर अपूर्ण रहती है तो पदोन्नति पर रोक लगा दी जाएगी। इसके बावजूद चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट अब तक ऑनलाइन नहीं भरी जा सकी है। 

15 मई 2025 को तत्कालीन आयुष महानिदेशक मानवेंद्र सिंह ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश जारी किए थे कि एमओसीएच की एसीआर मानव संपदा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से भरी जाए। हालांकि, इस आदेश की अनदेखी की गई। वर्तमान में भी इन चिकित्साधिकारियों की एसीआर मैनुअल ही तैयार की जा रही है।

ये है समस्या

प्रदेश में चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य के लगभग 1600 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से वर्तमान में करीब 600 पदों पर नियुक्तियां हैं। बीएएमएस डिग्रीधारी इन चिकित्साधिकारियों की नियुक्ति आयुष विभाग के अधीन होती है, लेकिन कार्य वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (एलोपैथ) विभाग में मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन करते हैं। 

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वेतन का भुगतान भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाता है, लेकिन जब पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होती है तो इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही कारण है कि एमओसीएच चिकित्साधिकारी जिस पद पर नियुक्त होते हैं, उसी पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं। अब तक इनके लिए कोई पदोन्नति व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है, जिससे चिकित्साधिकारियों में गहरी नाराजगी है।

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