राजधानी में जन लोकपाल विधेयक आंदोलन फिर गरमाएगा। 10 दिसंबर को अन्ना हजारे के साथ इंडिया अंगेस्ट करप्शन के कार्यकर्ता लखनऊ समेत सभी जिलों में भी आंदोलन छेड़ेंगे।
रविवार को अन्ना समर्थक अखिलेश सक्सेना, मेजर एसएन त्रिपाठी, सुरेश कुमार, रामकृष्ण और हिमांशु भारत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी गई अन्ना हजारे की अलख अब रंग लाने लगी है।
अन्ना हजारे ने जन लोकपाल विधेयक पारित कराने के लिए केंद्र सरकार को अल्टीमेटम दिया था।
उन्होंने कहा था कि अगर मानसून सत्र तक विधेयक पारित नहीं करवाया गया तो वे शीतकालीन सत्र से पहले अपना आंदोलन शुरू करेंगे।
यह आंदोलन दिल्ली के रामलीला मैदान में होना था, लेकिन चिकित्सकों की सलाह पर अन्ना ने अपने गांव में ही आंदोलन शुरू करने का निर्णय किया है।
अखिलेश ने बताया कि अन्ना के साथ पूरे देश में उनके समर्थक क्रमिक अनशन कर विरोध जताएंगे। लखनऊ के साथ ही बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, कानपुर, सुल्तानपुर, बहराइच और फैजाबाद में भी आंदोलन की तैयारियां पूरी हो गई हैं।
उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार विरोधी जनांदोलन चलाने के लिए संगठनों के प्रतिनिधियों ने झूलेलाल पार्क में अनशन की अनुमति मांगी है, लेकिन आवेदन के कई दिन बाद भी जिला प्रशासन से कोई आश्वासन नहीं मिला है।
ऐसे में जीपीओ स्थित पटेल प्रतिमा पर अनशन शुरू किया जाएगा। क्रमिक अनशन में रोज पांच लोग बैठेंगे। पहले दिन मंगलवार को अखिलेश सक्सेना, भुवन चंद्र पांडे, देवीदत्त पांडे, पुरुषोत्तम शुक्ला और उमेश अनशन पर बैठेंगे।
आंदोलन के दौरान इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ता जनता का घोषणा पत्र मसौदे पर रायशुमारी करेंगे। कार्यकर्ता सभी जिलों के प्रत्येक गांव में नागरिक परिषद का गठन करेंगे।
इसमें हर गांव से 30 लोगों को चुना जाना है। यह इकाई जिले के बाद प्रदेश स्तर पर गठित होगी। इसके साथ ही भ्रष्टाचार विरोधी ब्रिगेड भी बनाया जाएगा।
आम आदमी की विजय की शुरुआत
दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद अन्ना समर्थक आम आदमी पार्टी के समर्थन में खुलकर सामने आने को तैयार नहीं हुए और न विरोध में बोलना ही उचित समझा।
एक सवाल के जवाब में सुरेश कुमार ने कहा कि यह तो तय था। अन्ना के आंदोलनों ने आमजन को झकझोरा है। लोग भ्रष्टाचार से ऊब चुके हैं। ऐसे में उन्हें राजनीतिक दलों का विकल्प चाहिए।
यह परिणाम इस बात की पुष्टि करते हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले लोग किसी दल से नहीं पहचाने जाते, वे अन्ना के नाम से जाने जाते हैं। आम आदमी की विजय शुरुआत है। लड़ाई आगे भी है जो कठिन है।