प्रदेश में 5.2 करोड़ से अधिक गाय व भैंस हैं। इनमें से अब तक 1.33 करोड़ की ईयर टैगिंग हो चुकी है, जिनमें 66 लाख गाय और 67 लाख भैंसें शामिल हैं। पशुओं के गले या कान में एक विशेष प्रकार की रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडी चिप लगाई जाएगी। इसमें 12 अंकों के यूआईडी से देश में कहीं से भी एक क्लिक पर पशु व पशुपालक का पूरा ब्योरा देखा जा सकेगा।
पशुओं के अवैध परिवहन पर लगेगी रोक
ईयर टैगिंग का उद्देश्य गोवंश की नस्ल व दूध उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है। इससे गोवंश के अवैध परिवहन पर अंकुश भी लगेगा और गुम हुए गोवंशों को ढूंढने में आसानी होगी। टीकाकरण के बाद दिए जाने वाले कार्ड पर पशु का यूआईडी दर्ज किया जा रहा है। इससे पशुओं की बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिलेगी।