लखनऊ। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की भूमिका अब सिर्फ बेहोशी देने तक ही सीमित नहीं है। ये गंभीर मरीजों के इलाज में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सड़क हादसा होने या मरीज के वेंटिलेटर पर जाने पर एनेस्थीसिया विशेषज्ञ अल्ट्रासाउंड से उसके मर्ज का पता लगा लेते हैं। पहले इन मरीजों को रेडियोलॉजी में जांच के लिए भेजा जाता था, जहां जांच व रिपोर्ट आने में वक्त लगता था।
पीजीआई के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रभात तिवारी ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। डॉ. तिवारी ने बताया कि विभाग की ओर से भारतीय एनेस्थीसियोलॉजिस्ट सोसायटी यूपी चैप्टर का तीन दिवसीय वार्षिक सम्मेलन शुक्रवार से शुरू होगा। आयोजन सचिव डॉ. आशीष कनौजिया, डॉ. संदीप खुबा व डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने बताया कि सम्मेलन में शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। सम्मेलन में देशभर से आने वाले विशेषज्ञ एनेस्थीसिया की नई विधि के बारे में बताएंगे।
विभाग आज मनाएगा स्थापना दिवस
पीजीआई के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग का 38वां स्थापना दिवस शुक्रवार को प्रो. सोमा कौशिक सभागार में मनाया जाएगा। मुख्य अतिथि क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार पांडेय व्याख्यान देंगे। इस मौके पर पीजीआई निदेशक पद्मश्री डॉ. आरके धीमान और संस्थान के डीन डॉ. शालीन कुमार व दूसरे विशेषज्ञ विभाग की उपलब्धियां बताएंगे। मौके पर विभाग के संकाय सदस्यों और कर्मचारियों को भी सम्मानित किया जाएगा।