छात्रों की मानें तो इससे पहले हिंदी विषय की ऑनलाइन कक्षाओं में भी ऐसी घटनाएं हुईं। तब भी शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। व्हाट्सएप ग्रुप में छात्रों के सत्यापन की कोई प्रक्रिया नहीं है। लिंक के माध्यम से कोई भी जुड़ सकता है। छात्रों ने ही दूसरे बाहरी तत्वों को लिंक शेयर किया होगा।
आखिर कैसे जुड़ गए बाहरी तत्व
मामले में लविवि के प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने कहा कि व्हाट्सएप ग्रुप में शिक्षक के साथ छात्र भी एडमिन होते हैं। बाहरी तत्व कैसे जुड़ गए जांच का विषय है। उन्होंने बताया कि संबंधित विभाग के शिक्षक की तरफ से जानकारी मिली तो विभागाध्यक्ष को अवगत करा दिया गया। लविवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद हसनगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है।
कार्रवाई कर रिपोर्ट भेजें
लखनऊ विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. आलोक कुमार राय का कहना है कि चीफ प्रॉक्टर को निर्देश दिए हैं कि इस मामले पर जल्द लीगल कार्रवाई करें और रिपोर्ट भेजें। पिछले साल ऐसी घटना हिंदी की कक्षा में हुई थी तब विवि ने ऑनलाइन कक्षा की एक सुदृढ़ व्यवस्था स्लेट शुरू की थी। सभी शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वे स्लेट का इस्तेमाल करेंगे तो ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।