गांवों में एक कहावत है कि नया मुल्ला प्याज अधिक खाता है। ऐसा ही कुछ शिक्षा विभाग के एक निदेशालय में हो रहा है।
इस निदेशालय का अध्यक्ष एक महिला को बनाया गया है। हालांकि, इन्हें पहले भी अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन ज्यादा तेजी दिखाने के चक्कर में 24 घंटे में हटा दिया गया।
इस बार भी इनकी यह तेजी कायम है। इन्हें अपने अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं है, इसलिए अनाप-शनाप आदेश जारी करती रहती हैं।
पहले आदेश जारी किया कि शासन को भेजी जाने वाली फाइलें इन्हें दिखाए बिना नहीं जाएंगी। नियम-कानून देखे गए कि क्या कहीं ऐसी व्यवस्था है, लेकिन कहीं कुछ नहीं मिला।
शासन में इसको लेकर पंचायत बैठाई गई तो साफ हुआ कि शासकीय कामों के संबंध में फाइल दिखाने की जरूरत नहीं है। यह मामला अभी चल ही रहा था कि एक नया फरमान जारी कर दिया कि निदेशक छुट्टी पर जाने से पहले उनके संज्ञान में लाएंगे।
अब अध्यक्ष साहिबा को कौन बताए कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, पर वह मानने को तैयार नहीं हैं। कह रही हैं-मुझे तो काम करने के लिए भेजा गया है।