लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में बुधवार को शास्त्रीय संगीत के सुर सजे। स्वर वाद्य और गायन विभाग की तीन दिवसीय कार्यशालाओं के पहले दिन विशेषज्ञ कलाकारों ने विद्यार्थियों को राग और वादन की बारीकियां समझाईं। कार्यशालाएं 25 सितंबर तक चलेंगी।
राग श्याम कल्याण का कराया अभ्यास
स्वर वाद्य विभाग की कार्यशाला में दिल्ली की प्रख्यात सरोद वादिका व संगीत शोधकर्ता डॉ. चंद्रिमा मजूमदार ने सरोद वादन की तकनीक और व्यावहारिक पक्ष समझाए। उन्होंने लखनऊ घराने के उस्ताद शेखावत हुसैन खान और तबला वादक उस्ताद अहमद जान थिरकवा के योगदान पर चर्चा की। इसके बाद राग श्याम कल्याण के स्वर-विन्यास और विशेषताओं को समझाया। विद्यार्थियों को तीनताल में मसीतखानी गत का अभ्यास भी कराया। डॉ. चंद्रिमा ने भातखंडे से पीएचडी की है।
बिलावल के रागों का समझाया अंतर
गायन विभाग की कार्यशाला में विदुषी अंजली मालकर ने बिलावल के प्रकार विषय पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बिलावल अंग के विभिन्न रागों के स्वर-विन्यास, आपसी अंतर और गायन की विशेषताओं को उदाहरणों के साथ समझाया। वह गायिका के साथ संगीत इतिहासकार, शोधकर्ता और शिक्षिका भी हैं। कार्यशाला का संयोजन प्रो. सृष्टि माथुर कर रही हैं।