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ड्राइवर को झपकी आने से पलटी वॉल्वो बस, कई घायल

Fri, 22 Apr 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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परिवहन विभाग की साठगांठ का नतीजा है कि राजधानी में डग्गामार बसें फर्राटा भर रही हैं। एक ऐसी ही डग्गामार एसी बस अमौसी स्थित चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बृहस्पतिवार की सुबह ड्राइवर को झपकी आने से पलट गई।
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बस की रफ्तार इतनी तेज थी कि सवारियों से भरी बस का अगला हिस्सा करीब 10 फीट हवा में उछल गया। डिवाडर पर लगी जाली तोड़ते हुए बस वापस सड़क पर आई और पलटकर करीब 40 फीट तक घिसटती चली गई। भीतर बैठी सवारियों में चीख-पुकार मच गई।

सूचना पाकर पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। हालांकि, तब तक राहगीरों की मदद से बस में बैठी सवारियों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। एसओ सुधीर कुमार ने बताया कि सब्जी मंडी तीन नंबर बगिया में मस्जिद के ठीक सामने तेज रफ्तार बस का पहिया डिवाइडर पर चढ़ गया था। हादसे में पांच लोगों को चोट आई है।
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एक सवारी मौके से चली गई जबकि बाकी चार को अस्पताल भेजा गया है। सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस मौके पर भेज दी गई थी। बस दिल्ली के आनंद विहार से सवारियां लेकर लखनऊ आ रही थी।

दहशत से मची चीख-पुकार

घटनास्‍थल पर लगी भीड़ - फोटो : amar ujala
बस में पांच बच्चे समेत 30 सवारियां थीं। बस पलटने के बाद सभी दहशत में आ गए। उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया लेकिन काफी देर तक सवारियां सामान्य नहीं हो सकीं। बस से बाहर निकलने के बाद भी लोगों की आवाज और हाथ-पैर कांप रहे थे।

सवारियों में शामिल तीन महिलाएं फूट-फूटकर रो रही थीं। एसओ सरोजनीनगर ने बताया कि सुल्तानपुर के मुसाफिरखाना कानपुरिया का पुरवा निवासी रामसेवक (42) का दायां पैर बस में फंसने से फ्रैक्चर हो गया है।

रामसेवक मुंबई में फिल्म व टीवी सीरियल के सेट बनाने का काम करते हैं। वह अपने भांजे राजकुमार और बहनोई प्रमोद कुमार यादव के साथ लखनऊ आ रहे थे। भांजे व बहनोई के हाथ-पैरों में भी चोटें लगी हैं।

जौनपुर के मछलीशहर निवासी शिवराम (41) सहित एक अन्य युवक को चोटें आईं। हालांकि, पुलिस के आने पर युवक मौके से जा चुका था। बाकी चारों घायलों को लोकबंधु अस्पताल भेजा जहां से सबको ट्रामा रेफर कर दिया गया।

ऐसा लगा कि भूकंप आ गया

रामसेवक ने बताया कि  ऐसा लगा कि अचानक भूकंप या जलजला आ गया हो। तेज आवाज और झटका लगा, जिसके बाद बस कई बार झटका खाई। ऐसा लगा जैसे बस बेकाबू होकर किसी से टकराते-भिड़ते आगे जा रही हो। तीन-चार टक्कर के बाद बस पलट गई। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

बस में सवार कुछ परिवारों के साथ पांच बच्चे भी थे जो दहशत से चीखने-रोने लगे। उन्हें भी चोटें आई हैं। इन बच्चों की बस में इंट्री नहीं दर्शाई गई है।

परिवारीजन बच्चों को कलेजे से चिपटाकर बहलाते रहे, लेकिन उनका रोना बंद नहीं हुआ। पुलिस ने सभी लोगों को दूसरी बस से आगे की यात्रा पर भेजा।

दिल्ली से 47 सवारी लेकर चली थी बस

घायल को अस्पताल ले जाते लोग - फोटो : amar ujala
बस दिल्ली निवासी हरिकिशन की है। परिचालक अवध किशोर शर्मा ने बताया कि बस रायबरेली निवासी जितेंद्र चला रहा था।

बुधवार रात करीब साढ़े दस बजे दिल्ली के आनंदविहार से वह 47 सवारी लेकर निकला था। कानपुर देहात में सात सवारी उतारीं जबकि कानपुर में 18 लोग उतर गए। लखनऊ के लिए दो-तीन सवारी और बैठ गईं।

ड्राइवर को ऊंघते देख यात्रियों ने टोका था
यात्रियों ने बताया कि ड्राइवर जितेंद्र कानपुर पहुंचते-पहुंचते ऊंघने लगा था। रास्ते में कई बार बस लहराई तो लोगों ने टोका।

इस पर ड्राइवर ने पानी पिया व मुंह पर छींटे मारे और फिर से बस चलाने लगा। सरोजनीनगर पहुंचते ही ड्राइवर की आंखें बंद होने लगीं जिससे हादसा हो गया।

क्रेन से उठाकर किनारे की बस

मेट्रो के निर्माण कार्य के चलते घटनास्थल के पास ही भारी-भरकम क्रेन मौजूद थीं। इन क्रेन की मदद से चंद मिनट में ही बस को सीधा करने के बाद सड़क के किनारे खड़ा कर दिया गया। तत्काल कार्रवाई से कानपुर-लखनऊ के व्यस्त रूट पर जाम लगने से बच गया।

शाबाश अरुण! दिखाई हिम्मत, यात्रियों को बस से निकाला
हादसे के वक्त सरोजनीनगर निवासी केबल का काम करने वाला आलोक उर्फ अरुण मौके से ही गुजर रहा था। बस पलटते और यात्रियों की चीख-पुकार सुनते ही वह मदद के लिए दौड़ा।

बकौल अरुण बस के खिड़की-दरवाजे लॉक थे और भीतर घुसने का रास्ता नहीं था। ऐसे में वह कहीं से बेलचा लाया और पीछे की तरफ का शीशा तोड़कर बस के भीतर घुस गया।
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कांच से कंधे व पीठ पर चोटें आईं

कांच से उसके कंधे व पीठ पर चोटें आईं। कपड़े फट गए लेकिन अरुण ने परवाह नहीं की। वह भीतर घुसा तो सवारियां सीट में फंसी दर्द से करा रही थीं।

किसी के ऊपर लगेज गिरा था तो कोई बेसुध पड़ा था। अरुण ने सवारियों को संभाला और हिम्मत बंधाई।

उसने एक-एक करके सवारियों को सहारा देकर बाहर निकाला। अरुण को मदद करते देख अन्य राहगीर भी आ गए।
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