सिविल जज जूनियर डिवीजन इला चौधरी ने आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की फेसबुक अकाउंट बिना कारण बताए बंद करने पर क्षतिपूर्ति और उसे फिर से चालू करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। जज ने कहा कि यह याचिका सुनवाई के लिए ग्रहण योग्य नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि वादी की ओर से बहस के दौरान ऐसा कोई तर्क या नियम पेश नहीं किया, जिससे पता चले कि फेसबुक पर अकाउंट खोलने के बाद कोई उसका आजीवन उपयोग कर सकता है। या फिर एफबी अकाउंट संचालित करना वादी का सिविल अधिकार हो। वहीं, वादी नहीं यह भी स्पष्ट नहीं कर सका कि फेसबुक अकाउंट बंद होने से उसके किस अधिकार का हनन हुआ है। जिसके चलते उसे वाद दायर करना पड़ा।
पत्रावली के अनुसार फेसबुक ने पिछले महीने 24 सितंबर को आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के अकाउंट को अस्थायी रूप से बाधित कर दिया। इस पर वादी ने एफबी के सामने अपना पक्ष रखा। जिसे अस्वीकार करते हुए एफबी ने 27 सितंबर को अकाउंट बंद कर दिया। फेसबुक ने कहा, वादी ने सामुदायिक मान्यताओं का पालन नहीं किया है। इसके बाद अमिताभ ठाकुर ने सिविल जज के सामने वाद दायर करके कहा कि एफबी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वादी ने किस तरह सामुदायिक मान्यताओं का उल्लंघन किया है। इसके साथ ही वादी ने कोर्ट में याचिका दायर कर एफबी से अकाउंट चालू कराने और क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की थी।