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अमिताभ ठाकुर के मामले ने रोका गायत्री के जेल से बाहर आने का रास्ता

Thu, 27 Apr 2017 02:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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गायत्री प्रसाद प्रजाप‌त‌ि - फोटो : amar ujala
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आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर को रेप के फर्जी केस में फंसाने के जिस मामले को लखनऊ पुलिस करीब दो साल तक टालती रही, आखिरकार उसने ही खाकी की नाक बचाई।
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आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने उन पर लगे आरोपों को गलत साबित करने के लिए हर कोशिश की। तत्कालीन डीजीपी को प्रार्थनापत्र देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई तो सीएम आवास के बाहर धरने पर भी बैठे। इसके बाद भी पुलिस ने कुछ नहीं किया।

लेकिन जब गैंगरेप और पॉक्सो एक्ट में जमानत मिलने के बाद पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को दोबारा सलाखों के पीछे भेजने की बात आई तो अमिताभ ठाकुर की तरफ से गोमतीनगर थाने में गायत्री के खिलाफ दर्ज मुकदमा काम आया।
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ये था पूरा मामला

- फोटो : amar ujala
दरअसल अमिताभ ठाकुर की पत्नी व सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने अवैध खनन के मामले में 26 दिसंबर 2014 को गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत की थी।

इसके बाद 17 जनवरी 2015 को गाजियाबाद की एक महिला की तरफ से आईपीएस ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन पर रेप का आरोप लगाते हुए गोमतीनगर थाने के तत्कालीन एसओ सैयद मो. अब्बास को दिया हुआ एक प्रार्थना पत्र सामने आया।

नूतन ठाकुर का कहना था कि लोकायुक्त से शिकायत वापस न लेने पर गायत्री ने ही महिला के जरिए रेप की फर्जी शिकायत कराई और तत्कालीन एसओ ने किसी अधिकारी को बताए बगैर उनके व आईपीएस पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।

इस तरह दर्ज करा दिया गया मुकदमा

अधिकारियों से शिकायत के बाद 20 जून 2016 को डॉ. नूतन ठाकुर ने गोमतीनगर थाना में ही गायत्री के खिलाफ फर्जी दस्तावेज बनाकर उन्हें व अमिताभ ठाकुर को फंसाने की साजिश रचने का मुकदमा दर्ज कराया।

इसी बीच अमिताभ ठाकुर और डॉ. नूतन ठाकुर पर दर्ज रेप केस को झूठा बताते हुए सीओ गोमतीनगर सत्यसेन यादव ने 20 मार्च 2017 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी, जबकि नूतन ठाकुर की तरफ से दर्ज मुकदमे की विवेचना क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर विनोद शर्मा को सौंप दी गई।

नूतन ने तत्कालीन एसओ सैयद मो. अब्बास पर भी फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप लगाते हुए 18 अप्रैल 2017 को एफआईआर दर्ज कराई।

तत्कालीन कैबिनेट मंत्री और सपा सरकार के दबाव में पुलिस जिस मामले में करीब दो साल तक टालमटोल करती रही, अंतत: उसने ही अधिकारियों को राहत दी और गायत्री प्रसाद प्रजापति के जेल से बाहर निकलने के रास्ते फिलहाल बंद कर दिए।
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किशोरी ने बयान में यौन शोषण की बात से किया इन्कार!

गायत्री की जमानत अर्जी में बचाव पक्ष ने महिला की बेटी से यौन शोषण की बात पर सवाल खड़े किए हैं। अर्जी में कहा गया है कि पीड़िता के मुताबिक गायत्री ने अपने आवास में उसके सामने ही नाबालिग बेटी का यौन शोषण किया था।

बचाव पक्ष ने अपने प्रार्थना पत्र में किशोरी के बयान का जिक्र किया है। किशोरी ने कहा था कि गलत काम करने का मतलब वह समझती है। वह गायत्री प्रसाद को पहचानती ही नहीं है।

किशोरी ने यह भी कहा कि उसके साथ कुछ भी नहीं हुआ तथा किसी ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि किशोरी का बयान ही गायत्री की जमानत का सबसे बड़ा आधार साबित हुआ।

गौरतलब है कि गौतमपल्ली थाने में गायत्री के खिलाफ दर्ज गैंगरेप और पॉक्सो एक्ट के मुकदमे की विवेचना कर रहीं आलमबाग की तत्कालीन सीओ अमिता सिंह ने 13 अप्रैल को मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता की बेटी के बयान दर्ज कराए थे।
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