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अमित शाह की टीम में दिखेगा यूपी का दम

Fri, 08 Aug 2014 03:29 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की टीम में यूपी को ज्यादा भागीदारी मिल सकती है। इनमें खासतौर से अति पिछड़े चेहरों व महिलाओं को।
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शाह शनिवार को दिल्ली में राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अपने अध्यक्ष पद पर मुहर लगने के बाद टीम के गठन की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। प्रदेश से इस बैठक में सबसे अधिक 250 लोग शामिल होंगे।

पार्टी के संविधान के मुताबिक, शाह को राष्ट्रीय परिषद से अनुमोदन के बाद अपनी टीम का नए सिरे से गठन करना होगा। स्वाभाविक रूप से उनके एजेंडे में यूपी सबसे ऊपर रहेगा, क्योंकि शाह को भी पता है कि उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाने में यूपी के नतीजे काफी मददगार रहे हैं।
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उन्हें यह चुनौती भी ध्यान में होगी कि विधानसभा की 12 सीटों के निकट भविष्य में होने वाले उपचुनाव उनकी बड़ी परीक्षा बनने वाले हैं।

फेल नहीं होना चाहेंगे शाह

स्वाभाविक रूप से शाह कभी यह नहीं चाहेंगे कि जिस राज्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सांसद हों। उस राज्य से ही उनकी पहुंच-पकड़, नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक कौशल पर अभी से सवाल उठने लगें। इसलिए शाह अपनी टीम बनाने में यूपी के चेहरों को ज्यादा भागीदारी देने की कोशिश करेंगे।

शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के पहले तक उत्तर प्रदेश से राजनाथ सिंह को मिलाकर 10 चेहरे मुख्य संगठन में अलग-अलग भूमिका थे। इनमें आठ मुख्य टीम में ही पदाधिकारी थे।

राजनाथ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटने के बाद अब कल्याण सिंह, उमा भारती, मुख्तार अब्बास नकवी, सतपाल मलिक के रूप में चार उपाध्यक्ष, रामलाल व वरुण गांधी के रूप में दो महामंत्री और विनोद पांडेय मंत्री को मिलाकर सात पदाधिकारी रह गए हैं। इसके अलावा सुधांशु त्रिवेदी व विजय सोनकर शास्त्री दो प्रवक्ता व श्रीकांत शर्मा मीडिया प्रभारी हैं।

शाह की टीम में बुजुर्गों की जगह नहीं

राजनाथ सिंह के साथ उमा भारती मोदी कैबिनेट में मंत्री बनाई जा चुकी है। कल्याण सिंह को राजस्थान का राज्यपाल बनाने के संकेत हैं। ऐसा न भी हो तो भी मोदी के एजेंडे के अनुसार, शाह की टीम में बुजुर्गों को ज्यादा जगह मिलना मुश्किल है।

साथ ही शाह भी नहीं चाहेंगे कि उनके साथ इतने वरिष्ठ लोग पदाधिकारी हो जाएं, जिनसे वह कुछ कह ही न सकें। संघ नेतृत्व ने पहले ही उम्रदराज लोगों की दूसरी भूमिका तय करने की नीति को हरी झंडी दे दी है।

यह कसौटी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सतपाल मलिक को भी संगठन से हटाकर दूसरी भूमिका में भेजने के संकेत देती है। स्वाभाविक तौर पर इनकी जगह नए चेहरे शामिल करने होंगे।

उमा भारती की उत्तराधिकारी ढूंढ़ना मकसद

प्रदेश के महत्व के मद्देनजर वह उत्तर प्रदेश से आज की संख्या से अधिक लोगों को शामिल करना चाहेंगे। इसमें भी उनकी प्राथमिकता अति पिछड़े चेहरों पर होगी।

कारण, शाह को पता है कि यूपी में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ने में अति पिछड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

साथ ही उमा भारती के बाद संगठन की टीम में वह यूपी से किसी महिला को भी भागीदारी देना चाहेंगे।
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ये तलाश रहे शाह की टीम में जगह

शाह की टीम में शामिल होने के लिए जो लोग भागदौड़ में जुटे हैं। उनमें पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवप्रताप शुक्ला, स्वतंत्रदेव सिंह व पूर्व प्रदेश महामंत्री महेन्द्र सिंह शामिल हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी और मीडिया प्रभारी श्रीकांत शर्मा भी पदाधिकारी बनना चाह रहे हैं।

प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक और डॉ. मनोज मिश्र भी लखनऊ के बजाय दिल्ली में भूमिका निभाना चाहते हैं। पश्चिम के भूपेंद्र सिंह, सांसद रामशंकर कठेरिया, कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह भी राष्ट्रीय टीम में शामिल होने के दावेदार हैं।

भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दयाशंकर सिंह मोर्चा की मौजूदा राष्ट्रीय कार्यसमिति का हिस्सा शिवभूषण सिंह सहित कई युवा चेहरे भी नई भूमिका हासिल करने के लिए दौड़भाग में जुटे हैं।

इन्हें भरोसा है कि राजनाथ सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हट जाने के बाद पार्टी के विभिन्न मोर्चा व प्रकोष्ठों में उन्हें मौका मिल सकता है।
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