भाजपा के प्रदेश प्रभारी अमित शाह ने यूपी के भाजपाइयों से सूबे में पार्टी की मजबूती के लिए खुद को बदलने का आग्रह किया है।
साथ ही चेताया कि पार्टी में इसी तरह सब कुछ चलता रहा तो उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए तमिलनाडु बन जाएगा। न भाजपा का वजूद रहेगा और न भाजपा के लोगों का।
शाह शुक्रवार को लखनऊ में भाजपा की चुनावी तैयारियों के सिलसिले में पार्टी के पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व जिला अध्यक्षों, पूर्व महापौर व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्षों से बातचीत कर रहे थे।
पूर्व सांसदों व विधायकों की तरफ से शाह से पार्टी के भीतर संवादहीनता, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और गणेश परिक्रमा करने वालों को तरजीह देने के शिकवे किए गए।
इन लोगों ने यह दर्द भी जताया कि पार्टी के निर्णयों में उनकी कोई भूमिका नहीं रहती। ऐसा मान लिया गया है कि पूर्व होने के बाद वे अब पार्टी के किसी काम के नहीं रह गए हैं।
बैठक में कुछ लोगों ने नरेंद्र मोदी को लखनऊ से चुनाव लड़ाने की मांग भी की। पर, दिलचस्प यह रहा कि बैठक में लखनऊ से मौजूदा सांसद लालजी टंडन के आने के बाद सभी इस पर चुप्पी साध गए।
भाजपा की चुनावी तैयारियों को समझने के लिए शाह उत्तर प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। यह बैठक उसी सिलसिले में बुलाई गई थी। बैठक में शाह ने जो कुछ कहा, उससे यह भी साफ हो गया कि वह खुद यूपी में पार्टी की तैयारियों और स्थितियों को लेकर बहुत संतुष्ट नहीं है।
कम से कम शाह के पास जो सूचनाएं हैं, उनके अनुसार यूपी भाजपा के दावे कागजी ज्यादा हैं, जमीनी कम। पार्टी के भीतर गुटबाजी और खींचतान को लेकर भी वह आशंकित हैं। शायद यही वजह रही कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के महत्व को घुट्टी की तरह सूबे के भाजपाइयों को पिलाने की कोशिश की।
शाह की दिखाया गया आईना
बैठक में मौजूद लोगों ने शाह को भी आईना दिखाने में कसर नहीं छोड़ी। नेतृत्व के काम-धाम को लेकर सवाल उठे। एक नेता ने सामाजिक समीकरण का मामला भी उठाया।
एक प्रकोष्ठ का उदाहरण देते हुए कहा कि छह लोगों की टीम में चार ब्राह्मण और दो ठाकुर हैं। बाकी को कोई भागीदारी नहीं दी गई है। इन्होंने यह भी कहा कि बूथ कमेटियों से कुछ नहीं होगा। इसलिए पहले प्रत्याशी घोषित करें। प्रत्याशी घोषित होने के बाद कई काम स्वत: हो जाएंगे।
बैठक में उस समय तनाव व्याप्त हो गया जब संचालन कर रहे एक पूर्व विधायक ने 15 मिनट में सभी से सुझाव दे देने को कहा। कई पूर्व विधायकों ने आपत्ति की और कहा, ‘इससे अच्छा है कि सुझाव लिये ही न जाएं। जैसा अब तक चलता रहा है, वैसा ही आगे चलाइए। मनमाने फैसले कीजिए।’
ये शिकायतें भी मुखर हुईं कि पद देने से लेकर प्रत्याशी चयन तक में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती है। उसी से भाजपा की दशा खराब हो रही है।
यह भी कहा गया कि आयातित व आपराधिक छवि के लोगों को टिकट देंगे तो फिर कार्यकर्ताओं से सहयोग की आशा न करें। कुछ ने नेताओं के 40 सीटें हासिल करने के बयानों पर भी आपत्ति की। कहा कि 1977 की तरह ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की कोशिश की जाए।
'नीलकंठ' बन जाइए
बैठक में यह सवाल भी उठा कि प्रत्याशी के बारे में पार्टी के प्रति निष्ठा को लेकर कोई सवाल नहीं खड़ा होना चाहिए। महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग भी उठी। शाह ने जवाब में कहा कि यह समय आपस में उलझने और कमियां ढूंढने का नहीं है।
एक-एक सीट का महत्व है। प्रार्थना करता हूं कि अतीत को भूल जाइए। मतभेद भुला दीजिए। मनभेद खत्म कर दीजिए। खींचतान व गुटबाजी को भी थोड़े दिन के लिए किनारे रख दीजिए। उपेक्षा, अनादर व अपमान को भगवान के लिए दिल पर न लीजिए।
कुछ दिनों के लिए ‘नीलकंठ’ बन जाइए। सिर्फ भाजपा का ध्यान रखिए। फैसलों पर अमल करिए। यूपी में मुलायम सिंह यादव का मुजफ्फरनगर पर जो रूप सामने आया है, उसका ध्यान रखिए।
हिंदुओं पर संकट है। देश पर संकट है। यह बात लोगों को बताइए। भाजपा व हम सबके अस्तित्व का संकट है। लोकसभा का अगला चुनाव अस्तित्व की लड़ाई से जुड़ा है। इसलिए भाजपा के लिए वोट जुटाने को पूरी ताकत लगा दीजिए।
सिर्फ भाजपा व कमल का ध्यान रखिए
शाह ने कहा कि गलती से गलत प्रत्याशी घोषित हो जाए तो उसे हराने में न जुट जाए। नेतृत्व की गलती समझकर उसे स्वीकार कर लें। वह जीतेगा तो दिल्ली में भाजपा के ही सांसदों की संख्या बढ़ेगी। दिल्ली में सत्ता का फैसला संख्या बल पर ही होगा।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी, सांसद लालजी टंडन, महामंत्री राकेश जैन, सह प्रभारी रामेश्वर चौरसिया व सत्येन्द्र कुशवाहा भी मौजूद थे।
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