चर्चा है कि मंत्रिमंडल में दलित चेहरों की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। प्रदेश के 47 सदस्यीय मंत्रिमंडल में अभी दलित वर्ग के पांच सदस्य ही हैं। माना जाता है कि दलितों की लामबंदी पर काम कर रही सरकार इनकी भागीदारी पांच से बढ़ाकर 8-9 कर सकती है। इनमें विद्यासागर सोनकर का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। इसके अलावा आगरा के डॉ. जी.एस. धर्मेश, दीनानाथ भाष्कर का नाम भी चर्चा में है।
एस.सी.-एस.टी. एक्ट और प्रमोशन में आरक्षण जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक हुए विरोधी सुरों को देखते हुए अगड़े और पिछड़े लोगों को भी भागीदारी मिलना निश्चित है। अभी हाल में ही भाजपा के सामाजिक सम्मेलनों में गुर्जर समाज को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने की मांग उठी थी। माना जा रहा है कि पार्टी गुर्जर बिरादरी के विधान परिषद सदस्य अशोक कटारिया या विधायक तेजपाल सिंह नागर को मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है।
इसके अलावा विजय बहादुर पाठक और यशवंत सिंह तथा अपना दल के अध्यक्ष आशीष पटेल, भाजपा की सरकारों में पहले मंत्री रह चुके वीरेन्द्र सिरोही को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।पार्टी विधायक राधामोहन दास, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
प्रदेश के 47 सदस्यीय मंत्रिमंडल में 75 में अभी 44 जिलों का प्रतिनिधित्व ही नहीं है जबकि लखनऊ से सबसे ज्यादा 7 मंत्री हैं। अयोध्या भाजपा के एजेंडे का प्रमुख मुद्दा है लेकिन मंत्रिमंडल में वहीं का ही नहीं बल्कि पूरे फैजाबाद मंडल के किसी जिले का प्रतिनिधित्व ही नहीं है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर फेरबदल में अयोध्या को भागीदारी मिल सकती है।