पं. दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष पर संगठन विस्तार का लक्ष्य लेकर 92 दिन के देश भर के प्रवास पर निकले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह राजधानी में भी तीन दिन रुककर कई समीकरणों पर काम करेंगे।
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संगठन से लेकर सरकार का फीडबैक तो लेंगे ही तो इसी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संघ परिवार के अन्य संगठनों से भी बातचीत करके सरकार और विचार परिवार के बीच संवाद तथा संपर्क दुरुस्त कराने की कोशिश करेंगे।
तीन दिन में अलग-अलग डेढ़ दर्जन से ज्यादा बैठकें करके वह जिलों तक संवाद बनाने तथा उनकी समस्याएं और शिकायतें भी सुनने व समझने की कोशिश करेंगे। शाह 29 जुलाई को लखनऊ पहुंचेंगे और 31 जुलाई तक यहीं रहेंगे।
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शाह की देश के अलग-अलग राज्यों में चल रही तीन-तीन दिन का प्रवास 2019 की तैयारियों के मद्देनजर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बहाने शाह की कोशिश अलग-अलग राज्यों में हर तरह का फीडबैक जुटाना और जमीनी हकीकत समझना है।
मुख्यमंत्री व पत्रकारों के साथ मुलाकात
सीएम योगी आदित्यनाथ
जिससे खामियों को दूर कर लोकसभा चुनाव में जीत की तैयारियों को पुख्ता स्वरूप दिया जा सके। तीन दिन के प्रवास में वह यहां प्रदेश से जुड़े राष्ट्रीय पदाधिकारियों, सांसद, विधायकों, पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों, मोर्चा के प्रदेश अध्यक्षों, प्रकोष्ठों के प्रदेश संयोजकों, प्रकल्पों के प्रदेश प्रमुखों, भाजपा के जिलाध्यक्षों के साथ बैठकें करेंगे।
इसके अलावा समाज के प्रबुद्ध जन उदाहरण के लिए डॉक्टरों, शिक्षकों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ भी मुलाकात करेंगे। इसी के साथ वह आई.टी. सोशल मीडिया व प्रदेश की मीडिया टीम के लोगों के साथ भी संवाद कर उनके अनुभव जानेंगे और भविष्य की चुनौतियों के मद्देनजर और आक्रामकता से काम करने का सुझाव देंगे।
राजधानी प्रवास के दौरान शाह मुख्यमंत्री के साथ भी बातचीत करेंगे। दूसरे राज्यों के कार्यक्रमों को देखते हुए माना जा रहा है कि यहां भी रात्रिभोज के बहाने मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान कुछ वरिष्ठ पत्रकार भी आमंत्रित रहें।
शाह इस प्रवास में पार्टी से जुड़े महापौरों, निकाय अध्यक्षों, जिला पंचायत अध्यक्षों से भी मुलाकात करेंगे। भाजपा पदाधिकारियों व जिलाध्यक्षों के साथ उनकी बैठकों के कई दौर होंगे।
वरिष्ठों व कनिष्ठों दोनों से संवाद
amit shah
- फोटो : Amar Ujala
शाह के कार्यक्रमों की रूपरेखा से संकेत निकलता है कि राज्यों के प्रवास के दौरान शाह 2019 के मद्देनजर न सिर्फ समीकरण दुरुस्त कर लेना चाहते हैं बल्कि छोटे-बड़े सभी से मुलाकात कर उनकी सुन लेना चाहते हैं।
जिससे उन्हें हकीकत का अंदाज रहे। इसीलिए उनका कोर कमेटी से बातचीत के बहाने जहां पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ लोगों से बातचीत का कार्यक्रम है वहीं विस्तारकों के साथ बातचीत करके शायद वह जमीन पर भाजपा की मौजूदा स्थिति को समझ लेना चाहते हैं।
उनकी कोशिश शायद यह भी जानने की है कि विस्तारक योजना से संगठन के विस्तार और मजबूती का काम कहां तक पहुंचा है। कहां पर कमी है और उसे किस तरह दुरुस्त करना है।
जानकारी के मुताबिक, तीन दिन के प्रवास के दौरान यहां भी शाह किसी दलित परिवार के घर भोजन करके लोकसभा के आगामी चुनाव के मद्देनजर दलितों को रिझाने की कोशिश करेंगे।
बसपा सुप्रीमो मायावती के सहारनपुर के दलितों के उत्पीड़न को मुद्दा बनाते हुए राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देने की घटना को देखते हुए माना जाता है कि शाह किसी दलित परिवार के घर भोजन करके इसका असर भी कम करने की कोशिश करेंगे।
जिस तरह लखनऊ में विधायकों ने मुख्यमंत्री के सामने और दिल्ली में सांसदों ने उनके और प्रधानमंत्री के सामने कहीं सुनवाई न होने का रोना रोया है।
प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों की शिकायतें भी उजागर की हैं। उसके मद्देनजर माना जा रहा है कि शाह इस दौरे में इन सबकों साथ बैठाकर शिकवा-शिकायतें दूर कराएं।
साथ ही सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं की तरफ से लगातार सामने आ रहे असंतोष को दूर करने के लिए मंत्रियों को कुछ हिदायत भी दें।