अमीश त्रिपाठी ने कहा कि आज अंग्रेजी का बोलबाला है, लेकिन हिंदी में काफी अच्छे लेखक हैं। नरेंद्र कोहली उनमें से एक हैं। उनके अनुसार हिंदी के लेखकों को मार्केटिंग और अच्छे अनुवाद की जरूरत है। अपनी मार्केटिंग उन्हें खुद ही करनी होगी, तभी उनकी पहचान बनेगी।
प्राचीन काल से भारतीय परंपरा में सशक्त रहीं महिलाएं
अमीश ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण की बात आज हो रही है, लेकिन भारतीय परंपरा में हमेशा से वे सशक्त रही हैं। हमारी परंपरा में महिला और पुरुष में कभी भी भेद नहीं रहा है। कहा गया है कि जहां पर महिलाओं की इज्जत नहीं है, वहां पर भगवान भी दया नहीं करते।
एक सवाल के जवाब में अमीश त्रिपाठी ने कहा कि जब मौका मिलता है तो काशी जाकर प्राचीन परंपरा का पालन कर रहे लोगों के साथ रहकर उसे महसूस करने का प्रयास करता हूं। इस परंपरा को अपनी कहानियों में शब्दों के माध्यम से बताने का प्रयास करता हूं।
युवाओं के सवालों का जवाब देते हुए अमीश त्रिपाठी ने कहा कि हमारी परंपराएं अच्छी रही हैं, लेकिन अति की हर जगह मनाही है। इसलिए बाल विवाह प्रथा भी सही नहीं है। उन्होंने यौन शिक्षा देने की वकालत की।
संयुक्त परिवार की परंपरा टूटने को उन्होंने दुखद बताया और समय के हिसाब से समाधान तलाशने को कहा। भारतीय ग्रंथों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे यहां श्रुत और स्मृति दोनों प्रकार की रचनाएं हैं। श्रुत रचनाएं जीवन के बारे में बताती हैं, इसमें नियम नहीं होते बल्कि जीवन के बारे में बातें होती हैं जबकि स्मृति में नियम हैं, जैसे मनु स्मृति। आधुनिक समय में हमारा संविधान ही स्मृति ग्रंथ है।
विमर्श कार्यक्रम के दौरान अमीश त्रिपाठी से इस समय हनुमान जी की जाति और धर्म को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि वे किसी प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी से बचते हैं। इसलिए सिर्फ इतना कहूंगा कि वे सभी के लिए पूज्य हैं।