घटना को सराय महासिन थाना जेठवारा जिला प्रतापगढ़ के नदीम और इसी जिले के कंधई थाने के पूरे देवजानी निवासी शहबाज उर्फ लंबू ने अपने एक अज्ञात मित्र के साथ मिलकर अंजाम दिया था।
एसपी ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने साजिश रचने वाले जाकिर व उसके दोनों रिश्तेदारों को बुधवार दोपहर बाद पीपरपुर थाने के आलमपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास से गिरफ्तार किया। पकड़े गए अभियुक्तों के पास से 3.5 लाख रुपये, एक अदद तमंचा व रेकी में प्रयुक्त एक बाइक बरामद हुई है।
अरसा पूर्व से बन रही थी योजना
एसपी ने बताया कि सत्य प्रकाश शुक्ल वर्ष 2008 में एक एसयूवी चोरी के मामले में जाकिर के साथ जेल गया था। उस मामले में जाकिर ने सत्य प्रकाश को बचाने की हर संभव कोशिश की थी। तभी से वह सत्य प्रकाश का करीबी मित्र हो गया था। सत्य प्रकाश काफी दिनों से बड़ी घटना करने की फिराक में था जिसे गुड्डू की मदद से अंजाम दिया गया।
एसपी का कहना था कि मामले का खुलासा करने में इस वजह से भी विलंब हुआ कि आरोपी सीधे सत्य प्रकाश के संपर्क में नहीं थे। सत्य प्रकाश व गुड्डू भी मोबाइल पर बात नहीं करते थे। इन लोगों लूट को अंजाम देने वालों की गुड्डू से बात होती भी थी तो व्हाट्स एप कॉल पर।
इस तरह बांटा गया लूट का पैसा
एसपी के अनुसार लूट के 26 लाख रुपये में से जाकिर को 2.5 लाख, अनीस व साजिद को डेढ़-डेढ़ लाख, नदीम व शहबाज को छह-छह लाख व अज्ञात लुटेरे को 5.5 लाख रुपये मिले थे। घटना के मास्टर माइंड सत्य प्रकाश को तीन लाख रुपये मिले थे।
एसपी अमेठी ने मीडिया से कहा कि सत्य प्रकाश प्रतिष्ठित परिवार से था। लूट कांड में फंसने की वजह से उसके परिवार की छवि धूमिल हो रही थी। लोक लाज के चलते उसने जहर खाया। घटना का खुलासा शाम पांच बजे तब हुआ जब प्रतापगढ़ जिला प्रशासन के हस्तक्षेप पर सत्य प्रकाश के परिवारीजनों ने उसकी अंत्येष्टि कर दी।
सत्य प्रकाश को किसने दी जानकारी
एसपी का कहना था कि भादर यूको बैंक के शाखा प्रबंधक की ओर से बाबूगंज की यूको बैंक के शाखा प्रबंधक से लाखों रुपया कैश मांगने की जानकारी सत्य प्रकाश को थी। उसे यह जानकारी कैसे मिली इसके जवाब में एसपी ने कहा कि इस सवाल का जवाब सत्य प्रकाश ही दे सकता था।