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होली हुई, हुआ ट्रेन हादस फिर भी नहीं आए राहुल गांधी

Wed, 25 Mar 2015 05:39 PM IST
रमाकांत तिवारी/अमर उजाला, सुल्तानपुर
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अमेठी में लगे सांसद राहुल गांधी के गुमशुदगी के पोस्टर के पीछे भले ही कोई सियासी वजह हो लेकिन पहली बार यहां के लोग अपने सांसद को खुद से दूर महसूस कर रहे हैं।  
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वर्ष 2004 से लगातार अमेठी की नुमाइंदगी कर रहे राहुल गांधी यहां के लोगों के सुख-दुख में भागीदार बनते रहे हैं।

पहली बार अमेठी के लोगों की ईद और होली बिना राहुल के बीत गई, वहीं जनता एक्सप्रेस के हादसे के शिकार क्षेत्र के आठ लोगों के जख्म पर वह मरहम लगाने भी नहीं पहुंच सके।

पहले की कई घटनाएं लोगों के जेहन में आज भी ताजा हैं, जब राहुल गांधी बड़े हादसे के बाद 24 घंटे के भीतर पीड़ितों के घर पहुंचते थे।

पोस्टर पर नाराज हैं कांग्रेसी

संसद का सत्र शुरू होने से ठीक पहले गुमनाम स्थान पर छुट्टी पर गए कांग्रेस उपाध्यक्ष व अमेठी सांसद राहुल गांधी की गुमशुदगी के पोस्टर उनके संसदीय क्षेत्र में लगे हैं।

पोस्टर को लेकर कांग्रेसी गरम हैं। वे इसके पीछे विपक्षियों की साजिश मान रहे हैं। संभव है कि कांग्रेसियों के आरोप में दम हो लेकिन यह भी उतना ही सच है कि पहली बार सांसद अमेठी के लोगों से इतने दूर हैं।

2004 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद लगातार तीसरी बार क्षेत्र की नुमाइंदगी कर रहे राहुल गांधी की क्षेत्र में सुलभता किसी स्थानीय सांसद की तुलना में कम नहीं रही है।

आमतौर पर क्षेत्र में उनकी विजिट का तिमाही औसत रहा है। आपात स्थितियों में वे 24 घंटे के भीतर क्षेत्र में पहुंच चुके हैं।
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कब-कब आए राहुल गांधी

नवंबर 2004 में गौरीगंज कस्बे में पटाखा व्यवसायी कल्ले के यहां हुए विस्फोट में पांच लोगों की मौत हो गई थी। तब राहुल गांधी उसी रात पीडि़त के घर पहुंचे थे।

24 अप्रैल 2014 को मुसाफिरखाना थाने के दखिनवारा में लगी आग से झुलसकर दादी व पोती की मौत हो गई थी। तब भी राहुल गांधी 24 घंटे के भीतर पीडि़त के घर पहुंच गए थे।

यह फेहरिस्त और भी लंबी है। रमजान के दौरान और होली के बाद आमतौर पर वे क्षेत्र में पहुंचकर लोगों के गले मिलते रहे हैं।
बीते लोकसभा चुनाव के बाद वह तीन बार क्षेत्र के दौरे पर आए।

उनकी क्षेत्र की अंतिम विजिट तीन दिसंबर 2014 को हुई थी। इस लिहाज से उन्हें क्षेत्र से दूर हुए करीब चार माह हो चुके हैं।  

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