तहसील से लेकर कलेक्टर-कप्तान और मुख्यमंत्री तक अपना दु:ख-दर्द पहुंचाने वाले लोगों की समस्याओं के समाधान में अमेठी और कासगंज जिले संयुक्त रूप से प्रदेश में अव्वल आए हैं। टॉप-10 में बुंदेलखंड के सात में से तीन जिले शामिल हैं।
हालांकि, बड़े शहर जहां के कलेक्टर की कुर्सी पाने की आईएएस अफसरों में होड़ लगी रहती है, उनमें से कोई भी जिला इस सूची में शामिल नहीं है। सरकार ने जुलाई की रैंकिंग जारी की है।
लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज सहित मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर के कलेक्टर भी मुख्यमंत्री के सर्वाधिक जोर वाले इस काम में 50वीं रैंक के भी नीचे हैं। टॉप-10 में बुंदेलखंड के सात में से तीन जिले झांसी, ललितपुर व जालौन शामिल हैं। बड़े महानगरों से जुड़े किसी भी जिले के कलेक्टर इस कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं। ऐसा एक भी जिला टॉप-10 में शामिल नहीं है।