राजधानी में नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा जरूरतमंद मरीजों को समय पर नहीं मिल पा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कुछ दिन पहले ही हिदायत दी थी कि एम्बुलेंस देरी से न पहुंचे। बावजूद इसके नि:शुल्क एंबुलेंस सेवा इन दिनों दम तोड़ रही है।
102 और 108 श्रेणी की एंबुलेंस जर्जर हालत में हैं। एम्बुलेंस से जीपीआरएस सिस्टम गायब हैं। ऐसे में रखरखाव का भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) की ओर से यह सुविधा जिले स्तर पर (जिला स्वास्थ्य समिति) सीएमओ और जिलाधिकारी की निगरानी में संचालित हो रही है।
लखनऊ में 102 श्रेणी के 34 वाहन, 108 श्रेणी की 28 तथा आईसीयू से लैस एडवांस लाइफ सपोर्ट (एलएलएस) की चार गाड़ी समेत 66 एंबुलेंस का संचालन हो रहा हैं। इनमें 102 और 108 की अधिकांश गाड़ियों से जीपीआरएस गायब है।
हालत यह है कि कई वाहनों में इंडीकेटर लाइट, चिकित्सीय उपकरण के साथ गेट के हत्थे तक नहीं हैं। ऐसे में जीपीआरएस न होने से एंबुलेंस की लोकेशन बता पाना सेवा प्रदाता एजेंसी जीवीके ईएमआरआई के पास नहीं है।
शिकायत आएगी तो करेंगे कार्रवाई
सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जरूरतमंद मरीज पास एम्बुलेंस को फौरन पहुंचना चाहिए। कोई भी शिकायत आती है तो सेवा प्रदाता एजेंसी पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
एम्बुलेंस का कर रहे रखरखाव
जीवीके ईएमआरआई, मीडिया प्रभारी, अजय यादव ने बताया कि लखनऊ में सभी एम्बुलेंस जीपीआरएस से लैस हैं। गाड़ियों का रखरखाव नियमानुसार किया जा रहा है।