डॉ. अंबेडकर महासभा की ओर से रविवार को ‘सामाजिक न्याय और हाशिए का व्यक्ति’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
जिसमें युवा कल्याण एवं खेलकूद राज्यमंत्री राम करन आर्य ने कहा कि दलितों व पिछड़ों के हाशिए पर होने से उन्हें सामाजिक न्याय नहीं मिल पा रहा है।
आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय के आंदोलनों की उपलब्धियां समाप्त हो रही हैं। जरूरत है डॉ. अंबेडकर व डॉ. लोहिया के सामाजिक-राजनीतिक चिंतन की नए संदर्भों में व्याख्या की जाए।
महासभा के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि सामाजिक न्याय ने विधायिका व कार्यपालिका में दलितों, पिछड़ों की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, लेकिन इस प्रक्रिया में हाशिए के समाज को भागीदारी नहीं मिल पाई है।
पत्रकार संतोष वाल्मीकि ने कहा कि स्पेशल कंपोनेंट प्लान का 27 फीसदी पैसा पिछड़े इलाकों में आवंटित करने के विचार का स्वागत किया जाना चाहिए।
अरबी, फारसी विवि के कुलपति अनीस अंसारी ने कहा कि दलितों व मुसलमानों को एक साथ मिलकर लड़ना होगा।
पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एसआर दारापुरी ने कहा कि जमीन के मुद्दे को दलित आंदोलनों का केंद्र बनाना होगा। इस अवसर पर युगल किशोर, सरन शास्त्री, डॉ. सत्या दोहरे, बीना मौर्या भी मौजूद रहे।