विकास दुबे जैसे अपराधियों को नेता व भ्रष्ट पुलिस कर्मियों का संरक्षण मिलता है। कानपुर की घटना में भी पुलिस ऑपरेशन की सूचना लीक हुई। सूचना लीक करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ‘अमर उजाला’ ने इस घटना को लेकर कुछ पूर्व पुलिस महानिदेशकों से बात की तो सभी ने इसे दुखद बताते हुए कहा कि अपराधियों को नेस्तनाबूद किया जाना चाहिए। अपराधियों के खिलाफ सुनियोजित कार्रवाई के लिए चर्चित रहे पूर्व डीजीपी बृजलाल ने माना कि कमजोर प्लानिंग के साथ पुलिस ऑपरेशन किया गया।
ऐसा लगा किसी आतंकी ने हमला किया
जिस तरह की घटना हुई है, उससे ऐसा लगता है अपराधी नहीं बल्कि किसी आतंकी ने हमला किया। पुलिस ऑपरेशन की सूचना लीक करने में भ्रष्ट पुलिसकर्मियों का ही हाथ होता है। ऐसे गद्दारों को छोड़ा नहीं जाना चाहिए। पुलिस को किसी राजनीतिक या अन्य तरह के दबाव को दरकिनार कर सघन कार्रवाई करनी होगी। मुख्यमंत्री को फरार अपराधियों की गिरफ्तारी पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित करना चाहिए। - एके जैन, पूर्व डीजीपी
अपराधियों के हौसले पस्त करने को उठाए जाएं सख्त कदम
विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी
- फोटो : amar ujala
विकास दुबे जैसे अपराधियों के सोर्स थाने तक होते हैं, जिससे उसे पुलिस के ऑपरेशन की जानकारी हुई। सवाल यह भी उठता है कि विकास दुबे बाहर कैसे आया? उसकी जमानत निरस्त कराने की कार्यवाही क्यों नहीं की गई? उसकी गतिविधियों की जानकारी क्यों नहीं रखी गई? उसके मददगारों को चिह्नित कर पुलिस को ऐसे सख्त कदम उठाने होंगे जिससे अपराधियों के हौसले पस्त हों। - विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी
मुखबिरी करने वालों पर हो कड़ी कार्रवाई
बृजलाल, पूर्व डीजीपी
- फोटो : amar ujala
विकास दुबे के बढ़े हौसलों के बारे में पुलिस पहले से जानती थी। वह दर्जा प्राप्त मंत्री की हत्या कर चुका था। पुलिस टीम को उसके मंसूबों का आभास नहीं हो सका। ऐसे अपराधियों की धरपकड़ सुनियोजित तरीके से की जानी चाहिए। पुलिस ऑपरेशन लीक हुआ। मुखबिरी करने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। - बृजलाल, पूर्व डीजीपी