अमर उजाला की अनूठी पेशकश संस्कृतियों का संगम अब महाकुंभ का रूप ले चुका है। तीसरे साल भी खासी भीड़ कार्यक्रम में पहुंची। संस्कृतियों का पहला संगम संगीत नाटक अकादमी 2022 में आयोजित हुआ। यह कारवां आगे बढ़ा और वर्ष 2023 में इसे रिवरफ्रंट पर लगाया गया। साल दर साल यह कारवां आगे बढ़ रहा है। संस्कृतियों, खानपान व मेले का लुत्फ उठाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। आने वाले समय में यह और भी भव्य रूप लेगा।
फिर मिलने के वादे संग विदा हुआ संगम
संस्कृतियों का महाकुंभ रविवार को कवि सम्मेलन के साथ ही समाप्त हो गया। दूसरे दिन बड़ी संख्या में दर्शक अमर उजाला के कार्यक्रम में पहुंचे। संगम संस्कृतियों का महाकुंभ विदा हो गया। इस वादे के साथ फिर मिलेंगे। भव्य और शानदार ढंग से। नए स्वाद के साथ। मनोरंजन के नए साधनों के साथ।