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Amar Ujala Samvad: ऑपरेशन के दौरान लगी थीं सात गोलियां, कीर्ति चक्र विजेता कमांडेंट दुबे ने साझा की शौर्य गाथा

Fri, 18 Apr 2025 05:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

इस ऑपरेशन के हीरो रहे कीर्ति चक्र विजेता बीएसएफ कमांडेंट नरेंद्र नाथ धर दुबे ने बताया कि उन्हें उस वक्त सात गोलियां लगीं थीं। एक गोली तो उनके शरीर में अभी भी है। 
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अमर उजाला संवाद के मंच पर पूर्व बीएसएफ डीआईजी नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वर्ष 2003 में बनी फिल्म ग्राउंड जीरो बीएसएफ के उस ऑपरेशन पर आधारित है जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी गाजी बाबा को नेस्तनाबूद किया गया था। इस ऑपरेशन के हीरो रहे कीर्ति चक्र विजेता बीएसएफ कमांडेंट नरेंद्र नाथ धर दुबे ने बताया कि उन्हें उस वक्त सात गोलियां लगीं थीं। एक गोली तो उनके शरीर में अभी भी है। 

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संवाद में उन्होंने कहा, उनके ऑपरेशन पर जब फिल्म बनाने का प्रस्ताव आया तो उन्होंने निर्देशक तेजस विजय के सामने शर्त रखी कि कहानी बिल्कुल रियल होनी चाहिए। वे अमर उजाला संवाद के पहले दिन के एक सत्र में इस फिल्म के अभिनेता इमरान हाशमी और निर्देशक तेजस विजय के साथ शामिल हुए।
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नरेंद्र नाथ ने बताया कि हमने जब उस ऑपरेशन को अंजाम दिया तो इस बात का खास ख्याल रखा कि किसी भी नागरिक को नुकसान न हो। खास बात रही कि ऑपरेशन में सभी आतंकी मारे गए और किसी सिविलियन को खरोंच तक नहीं आई। हमारा एक जवान बलिदान हुआ था। 

आम नागरिकों की जान बचानी होती है
सिहरन पैदा करने वाला एक अन्य संस्मरण सुनाते हुए पूर्व डीआईजी ने कहा, 'हमारे एक जवान की जिंदगी केवल इसलिए बच गई क्योंकि उसने जाड़े की टोपी पहन रखी थी। इस कारण हेलमेट अच्छे से फिट नहीं था। पिस्टल सटा कर गोली मारी गई, लेकिन वो बच गया, क्योंकि हेलमेट शरीर से अलग था।' 

उन्होंने बताया जैश-ए-मोहम्मद की निगरानी में गाजी बाबा हत्याएं करा रहा था। संवेदनशील हालात में ये प्रस्ताव भी आया कि सुरक्षाबलों को भी सिविल ड्रेस में आतंकियों को जवाब देना चाहिए। इसकी कोशिशें हुईं, लेकिन अधिक कामयाबी नहीं मिली। जम्मू-कश्मीर में कोई भी प्रयोग आत्मघाती भी हो सकता है। 
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सुरक्षाबलों पर अतिरिक्त जवाबदेही होती है, आम नागरिकों की जान बचानी होती है। जनहानि होने पर जवानों पर आरोप भी लगते हैं, लेकिन सुरक्षाबलों पर हमला हुआ है तो उन्हें बदला भी लेना है। ऐसे में ये दोधारी तलवार होती है।

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