आयुषी शर्मा और एकता शुक्ला
सीताजी ने जिस तरह अपने धर्म के प्रति अडिग रहकर तिनके को हथियार बनाया था। आज उसी तरह हमें भी अपने हौसले को अपना हथियार बनाकर विपरीत परिस्थितियों का सामना करना होगा। इसके लिए जरूरी है कि अपने सीता की तरह दृढ़ होना होगा। शोषण व अत्याचार का विरोध करना होगा। - आयुषी शर्मा, छात्रा, बीएफए
...जब है नारी में शक्ति सारी, तब उसे कहें क्यूं बेचारी। नारी दो शब्दों का जोड़ नहीं बल्कि एक शक्ति का नाम है। दीपोत्सव में नारी शक्ति का अद्भुत संगम दिखेगा। हमारे बिना कोई भी समारोह हो, अधूरा रहता। अब बेटी बचाओ अभियान के तहत बेटे को पढ़ाओ, बेटे को समझाओ अभियान चलाना चाहिए।-एकता शुक्ला, छात्रा, इतिहास विभाग
मोनिका उपाध्याय व नितिका तिवारी
नारी का अपमान करते हो अपने को महान कहते हो.., ये कविता रूपी व्यंग्य आज के हालात पर काफी हद तक सही बैठता है। आज समाज में महिलाओं का किसी न किसी रूप में अपमान और शोषण हो रहा है। दीपोत्सव पर दीपक जलाने के साथ-साथ हम सभी को शोषण करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने का संकल्प लेना होगा।- नितिका तिवारी, छात्रा, बीएफए
ये शास्त्रों में लिखा है जहां नारी की पूजा होती है, वहां भगवान वास करते हैं। ये एकदम सत्य बात है। लेकिन आज लोग इसे नहीं समझते और महिलाओं को अपमानित करने के मौके तलाशते रहते हैं। जो कि बहुत गंदी सोच है। आज जिस परिवार में महिलाओं का सम्मान नहीं है वहां शांति भी नहीं है।-मोनिका उपाध्याय, छात्रा, योगा विभाग
प्रिया सिंह व श्रेया पांडेय
...हर इक पल एक महिला कुचली जाती, क्या करोगे बढ़ाकर महिला अनुपात। आज भी पुरुष समाज महिला को टी बैग बनाने पर तुला है, लेकिन उन्हें अब ये समझना होगा कि आज की नारी टी बैग नहीं वरन आग का गोला है जो हर मुकाबले के लिए तैयार है। मीटू पर पीड़ित महिलाओं को मेरा समर्थन है। - श्रेया पांडेय, छात्रा, इतिहास विभाग
अब समय आ गया है कि महिला अपराध और घरेलू हिंसा के प्रति कुछ करने की सोच व विचार नहीं व्यक्त करना है बल्कि धरातल पर उतरकर कुछ करना होगा। हमें पाश्चात्य सभ्यता से सचेत रहकर अपनी मर्यादाओं का पालन कर समाज को सभ्य बनाना होगा। लोगों को जागरूक करना होगा।-प्रिया सिंह, छात्रा, एमटीए