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अमर उजाला संवाद: ...जब है नारी में शक्ति सारी, तब उसे कहें क्यूं बेचारी

Sat, 03 Nov 2018 12:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अमर उजाला संवाद
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अवध विश्वविद्यालय में महिला सशक्तिकरण पर शुक्रवार को आयोजित ‘ अमर उजाला संवाद’ में बेटियों के तेवर बदले से नजर आए। छात्राओं और शिक्षिकाओं ने एक स्वर में कहा कि ...जब है नारी में शक्ति सारी, तब उसे कहें क्यूं बेचारी.। अब बेटी बचाओ अभियान के तहत बेटे को पढ़ाओ व बेटे को समझाओ अभियान चलाना चाहिए।

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अवध विश्वविद्यालय के इतिहास व पुरातत्व विभाग के स्मार्ट क्लास रूम में शुक्रवार आयोजित संवाद में इतिहास, एमबीए, योगा, बीएफए समेत अन्य क्लास की छात्राओं व शिक्षिकाओं ने बेटा जैसे बनने की इच्छा को निरर्थक बताते हुए लोगों को बेटी जैसी बनने की बात कही। कहा कि हम बेटियां अयोध्या में छह नवंबर को दीपक जलाने का विश्व रिकॉर्ड बनाकर ही दम लेंगी, मगर इसकी सार्थकता तभी है जब समाज महिलाओं के प्रति सोच बदले।

शिक्षा, स्वास्थ्य, दहेज, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, अपहरण, दुष्कर्म आदि मुद्दों पर सकारात्मक आवाज उठाए। ना समझों मैं बेचारी हूं, नारी हूं मैं..., नारी शक्ति तू क्यों घबराएं..., जब है नारी में शक्ति सारी तो फिर क्यों उसे कहे बेचारी..., दो-दो कुलों की शान बढ़ाती हैं बेटियां व कुल का दीपक है बेटा तो बातियां हैं बेटियां... जैसी कविताओं के माध्यम से संवाद में मौजूद छात्राओं व शिक्षिकाओं ने दूसरों पर आश्रित व दोषारोपण करने के बजाए खुद को बौद्धिक रुप से मजबूत बनाने का संकल्प भी लिया।
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शिक्षिकाओं ने संदेश दिया कि दीपोत्सव का उद्देश्य विश्व रिकॉर्ड ही नहीं बल्कि अंधकार (समाज की नारियों के प्रति सोच) को बदलना भी है। महिलाएं दीप जलाते समय ये संकल्प लें कि वो अब कुरीति के बंधनों से मुक्त होकर समाज को दिशा देने का काम करेंगी। वहीं, छात्राओं ने एक स्वर में कहा कि हम काबिल हैं, हमें बस मौके की जरूरत है।

छात्राओं का मानना है कि लाख कानून बनाने के बाद भी महिला अपराध कम नहीं हो रहे हैं। इसके लिए अब हमें चुप्पी तोड़कर खुलकर आवाज उठानी होगी। समाज को जागरूक करना होगा। घरेलू हिंसा पर छात्राओं का कहना है कि इसके लिए हमें लोक लाज त्यागना होगा व दहेज, यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों का डटकर मुकाबला करना होगा।

आयुषी शर्मा और एकता शुक्ला
सीताजी ने जिस तरह अपने धर्म के प्रति अडिग रहकर तिनके को हथियार बनाया था। आज उसी तरह हमें भी अपने हौसले को अपना हथियार बनाकर विपरीत परिस्थितियों का सामना करना होगा। इसके लिए जरूरी है कि अपने सीता की तरह दृढ़ होना होगा। शोषण व अत्याचार का विरोध करना होगा। - आयुषी शर्मा, छात्रा, बीएफए 

...जब है नारी में शक्ति सारी, तब उसे कहें क्यूं बेचारी। नारी दो शब्दों का जोड़ नहीं बल्कि एक शक्ति का नाम है। दीपोत्सव में नारी शक्ति का अद्भुत संगम दिखेगा। हमारे बिना कोई भी समारोह हो, अधूरा रहता। अब बेटी बचाओ अभियान के तहत बेटे को पढ़ाओ, बेटे को समझाओ अभियान चलाना चाहिए।-एकता शुक्ला, छात्रा, इतिहास विभाग 

मोनिका उपाध्याय व नितिका तिवारी
नारी का अपमान करते हो अपने को महान कहते हो.., ये कविता रूपी व्यंग्य आज के हालात पर काफी हद तक सही बैठता है। आज समाज में महिलाओं का किसी न किसी रूप में अपमान और शोषण हो रहा है। दीपोत्सव पर दीपक जलाने के साथ-साथ हम सभी को शोषण करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने का संकल्प लेना होगा।- नितिका तिवारी, छात्रा, बीएफए 

ये शास्त्रों में लिखा है जहां नारी की पूजा होती है, वहां भगवान वास करते हैं। ये एकदम सत्य बात है। लेकिन आज लोग इसे नहीं समझते और महिलाओं को अपमानित करने के मौके तलाशते रहते हैं। जो कि बहुत गंदी सोच है। आज जिस परिवार में महिलाओं का सम्मान नहीं है वहां शांति भी नहीं है।-मोनिका उपाध्याय, छात्रा, योगा विभाग
 
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प्रिया सिंह व श्रेया पांडेय
...हर इक पल एक महिला कुचली जाती, क्या करोगे बढ़ाकर महिला अनुपात। आज भी पुरुष समाज महिला को टी बैग बनाने पर तुला है, लेकिन उन्हें अब ये समझना होगा कि आज की नारी टी बैग नहीं वरन आग का गोला है जो हर मुकाबले के लिए तैयार है। मीटू पर पीड़ित महिलाओं को मेरा समर्थन है। - श्रेया पांडेय, छात्रा, इतिहास विभाग 

अब समय आ गया है कि महिला अपराध और घरेलू हिंसा के प्रति कुछ करने की सोच व विचार नहीं व्यक्त करना है बल्कि धरातल पर उतरकर कुछ करना होगा। हमें पाश्चात्य सभ्यता से सचेत रहकर अपनी मर्यादाओं का पालन कर समाज को सभ्य बनाना होगा। लोगों को जागरूक करना होगा।-प्रिया सिंह, छात्रा, एमटीए
 
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