अमर सिंह ने कहा था कि हमारे जो मित्र मेरी मृत्यु की कामना कर रहे हैं, वह यह कामना छोड़ें। मृत्यु हर दम हमारे द्वार को खटखटाती है। झांसी में एक बार हवाई जहाज से गिर गया था तो भी यमराज ने मुझे स्वीकार नहीं किया। 10 साल पहले गुर्दे का प्रत्यारोपण हुआ तो भी वापस लौट कर आया। 12-13 दिनों तक मिडिल ईस्ट में वेंटिलेटर पर मौत से लड़कर आ गया।
उन्होंने कहा कि पहले के मुकाबले इस बार तो बिल्कुल स्वस्थ हूं, बिल्कुल सचेतन हूं। डॉक्टरों का कहना है कि मेरा मस्तिष्क किसी 10 साल के बच्चे से भी ज्यादा उर्वरक है। हमारे जो भी शुभेच्छु मेरी मौत की खबर फैला रहे हैं। उन्हें कोटि-कोटि धन्यवाद।