फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सपा में वापसी करते ही फॉर्म में आए अमर सिंह, रामगोपाल को लगाया ठिकाने

Tue, 25 Oct 2016 07:51 PM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
अमर सिंह व रामगोपाल यादव - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
देश के सबसे बड़े सियासी कुनबे में रार के ‘सूत्रधार’ माने जा रहे राज्यसभा सदस्य अमर सिंह फिलहाल सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के ‘दिल’ में बने रहेंगे। मुलायम ने सोमवार को साफ कर दिया कि चाहे जो हो जाए, वह अमर का साथ छोड़ने वाले नहीं हैं।
विज्ञापन


मुलायम पर अमर सिंह का रंग इस कदर चढ़ गया है कि वह बेटे व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक को फटकार लगाने में गुरेज नहीं कर रहे हैं। मुलायम ने अखिलेश से दो टूक कह दिया, ‘मेरे भाई हैं अमर सिंह। तुम्हारी हैसियत क्या है जो उन्हें गाली देते हो।’

इससे साफ है कि अमर सिंह की कीमत पर सपा सुप्रीमो कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं। अमर सिंह पर हमला बोलने और उन्हें ‘बाहरी’ बताने वाले रामगोपाल यादव को मुलायम ने पार्टी से बाहर का रास्ता तक दिखा दिया है।
विज्ञापन


सपा के दफ्तर में मुलायम ने एक बार फिर अपना ‘अमर प्रेम’ जाहिर कर दिया। उन्होंने जो भी कहा उसमें यह संदेश साफ छिपा था कि  वह अमर सिंह के ‘अहसान’ तले दबे हैं। उनके खिलाफ कुछ भी नहीं सुन सकते और उनका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे।

सपा में कम नहीं होगा अमर सिंह का दबदबा

अखिलेश का अमर सिंह पर हमला बोलना भी मुलायम को अच्छा नहीं लगा और उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी का इजहार भी कर डाला। स्पष्ट है कि अखिलेश समेत पार्टी के तमाम नेताओं के सीधे निशाने पर होने के बावजूद सपा में अमर सिंह का दबदबा कम होने वाला नहीं है क्योंकि मुलायम अब खुलकर उनके साथ खड़े हो गए हैं।

अखिलेश जिन साजिशों का जिक्र करके अमर सिंह को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, उसे मुलायम पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। ‘पुत्र मोह’ पर ‘अमर प्रेम’ भारी पड़ रहा है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब अमर सिंह को लेकर सपा में बखेड़ा हुआ हो। पहले भी गाहे-बगाहे उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन छह साल का सियासी वनवास झेलकर लौटे अमर इस बार मजबूत बनकर उभरे हैं। वक्त ने पलटी मारी है।

जनवरी 2010 में सपा से हुए थे बाहर

जनवरी 2010 में  रामगोपाल यादव से विवाद के चलते अमर सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था तो इस बार ‘अमर फैक्टर’ के चलते मुलायम परिवार के सदस्य रामगोपाल ही पार्टी से बाहर कर दिए गए। आजम खां की भी अमर सिंह से अदावत किसी से छिपी नहीं है।

वक्त की नजाकत को समझते हुए आजम सीधे तो नहीं लेकिन इशारे-इशारे में अमर सिंह पर हमला करने का मौका नहीं गंवा रहे हैं लेकिन ‘नेताजी’ के रुख के बाद अब शायद ही वह ज्यादा आक्रामक दिखाई दें।

बीते जून में अमर सिंह का राजनीतिक कॅरिअर फिर से जिंदा हो गया जब पार्टी के अंदर तमाम विरोधों के बावजूद मुलायम ने उन्हें राज्यसभा भेजा। इसके बाद अमर सिंह ने मुलायम पर दबाव बनाकर अपनी करीबी जयाप्रदा को फिल्म विकास परिषद का उपाध्यक्ष मनोनीत कराकर उनका ‘पुनर्वास’ करा भी लिया।

लेकिन इसके बाद जब उन्होंने शिवपाल को मोहरा बनाकर सरकार के कामकाज में दखलअंदाजी और पार्टी में अपना दबदबा बनाने की शुरुआत की तो अखिलेश ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी और उन्होंने ताबड़तोड़ कई फैसले करके अमर को संदेश दे दिया कि उनकी मनमानी चलने नहीं देंगे। हालांकि अखिलेश को इसकी कीमत अपना राजनीतिक कॅरिअर दांव पर लगाकर चुकानी पड़ रही है।
विज्ञापन

रामगोपाल यादव से हिसाब चुकता

रामगोपाल यादव - फोटो : amar ujala
सपा में अमर की वापसी की राह में रामगोपाल यादव लंबे समय तक रोड़ा बने रहे। राज्यसभा के लिए उनकी उम्मीदवारी का भी रामगोपाल ने आजम से मिलकर विरोध किया था। परिवार के ताजा झगड़े में रामगोपाल को पार्टी से बाहर कराकर अमर सिंह ने पुराना हिसाब भी चुकता कर लिया।

सपा में एंट्री मिलते ही फॉर्म में आए अमर
सपा के टिकट से राज्यसभा पहुंचते ही अमर सिंह फॉर्म में आ गए। उनकी कोशिश थी कि जैसे मुलायम की पिछली सरकार में उनका सिक्का चलता था, वैसे ही अखिलेश सरकार भी उनके इशारे पर काम करे, लेकिन अखिलेश इसके लिए राजी नहीं हुए। जहां मौका मिलता, अमर यह साबित करने से नहीं चूकते कि मुलायम उन्हें बहुत ‘प्रेम’ करते हैं। अखिलेश को वह अपना ‘बच्चा’ बताते रहे।

इसके बाद भी बात न बनती देख अमर ने अखिलेश को ही रास्ते से हटाने के लिए सियासी शतरंज की बिसात बिछानी शुरू कर दी। शिवपाल ऐसा मोहरा थे जिसके जरिये वह बाजी जीत सकते थे सो उन्होंने उनके जरिये ही खेल शुरू कराया और नतीजा यह हुआ कि पार्टी बंटवारे के कगार पर खड़ी है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें