मुख्य सचिव आलोक रंजन ने विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के सामने शासकीय सेवा की मुश्किलों को साझा किया।
उन्होंने बताया कि किस तरह इस सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में दायित्वों के निर्वहन में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
साथ ही उन्होंने सफल सेवा का मंत्र दिया कि इन कठिनाइयों में शासकीय दायित्वों से भटकने के बजाय उनका डटकर मुकाबला करना चाहिए।
काम में पादर्शिता जरूरी
मुख्य सचिव सोमवार को एनेक्सी स्थित अपने कार्यालय में भारतीय विदेश सेवा वर्ष 2013 के प्रशिक्षु अधिकारियों से भेंट कर रहे थे।
रंजन ने कहा, भारतीय प्रशासनिक सेवा में कड़ी मेहनत के बाद ईश्वर की कृपा से अवसर मिलता है। पीड़ित व्यक्ति की समस्याओं का समाधान कराने में आत्मा को सबसे बड़ी संतुष्टि मिलती है।
युवा अधिकारियों को पारदर्शिता के साथ काम करके और आम लोगों की समस्याओं का समाधान करके अलग पहचान बनानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि आम जनता से न जुड़े होने के बावजूद आईएफएस अधिकारी आम लोगों की समस्याओं की जानकारी सक्षम स्तर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
ये भी रहे इस मौके पर
इस मौके पर यूपी प्रशासन एवं प्रबन्धन अकादमी के महानिदेशक नेतराम व वरिष्ठ अधिकारी शीतल वर्मा उपस्थित थीं।
इन प्रशिक्षु अधिकारियों में सौम्या गुप्ता, कनिष्क शर्मा, विवेक सिंह व शुभम सिंह को एक माह के प्रशिक्षण के लिए क्रमश: आगरा, अलीगढ़, इलाहाबाद व वाराणसी भेजा गया है।
ये अधिकारी वहां एक माह की तैनाती में मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों के साथ रहकर प्रदेश सरकार के कार्यों की जानकारी प्राप्त करेंगे।