एक तरफ शिव सेना ने दावा किया है कि भाजपा से उनका गठबंधन पहले की ही तरह मजबूत है, तो दूसरी तरफ यूपी से लेकर बिहार तक मराठी बाबू का डर सताने लगा है।
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भले ही राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के साथ भाजपा के गठबंधन की पुष्टि न की हो, लेकिन यूपी के नेता नाखुश हैं।
हालांकि, पिछले दिनों भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की राज ठाकरे से मुलाकात और उसके बाद राज ठाकरे का मोदी के समर्थन में बयान देते हुए महाराष्ट्र से भाजपा के खिलाफ प्रत्याशी न खड़े करने का फैसला सारी कहानी कह रहा है।
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महाराष्ट्र में इससे भाजपा को फायदा मिल सकता है, लेकिन यूपी में राज और नाथ का यह गठबंधन भाजपा को काफी नुकसान भी पहुंचा सकता है।
पूर्व अध्यक्ष ने खड़ किए सवाल!
अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष और पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी ने इस गठबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का समर्थन हासिल करने के लिए राज ठाकरे से नितिन गडकरी की मुलाकात के भाजपा हाईकमान के फैसले की आलोचना की है।
यह भी पता चला है कि त्रिपाठी ने मुंबई में भाजपा के नेताओं को यह बताया भी है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में भाजपा को इस फैसले की अच्छी कीमत चुकानी पड़ सकती है। उनका डर है कि यह फैसला यूपी में उल्टा दांव साबित हो सकता है।
कथित तौर पर त्रिपाठी ने कहा है, 'आप मुंबई की दो सीट तो हासिल कर सकते हैं, लेकिन अन्य प्रदेशों में ज्यादा सीटें हार सकते हैं।'
राज ठाकरे की छवि से है खतरा
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें एक लिहास से त्रिपाठी का यह डर काफी हद तक सही भी है। त्रिपाठी को भी इस बात का डर सता रहा है कि राज ठाकरे की छवि उत्तर भारतीय विरोधी की रही है।
इसलिए यूपी में लोग भाजपा के इस फैसले से नाखुश होकर वोट न देने का फैसला कर सकते हैं।
यह वही राज्य है जहां से भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद है। ज्यादातर नेता दबी जुबां में यह बात मान रहे हैं कि यूपी के ही दम पर भाजपा 272 सीटों का जादुई आंकड़ा हासिल करने का सपना देख रही है।
हालांकि, त्रिपाठी ने इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा कि उन्होंने मनसे से समर्थन लेने के पार्टी फैसले की आलोचना नहीं की थी।
लेकिन, मुंबई के भाजपा नेताओं ने इस बात की तस्दीक की कि त्रिपाठी ने अपना सुझाव और निराशा दोनों ही व्यक्त किया था। कुल मिलाकर पार्टी अब डैमेज कंट्रोल करने में जुटी है।
तो इसलिए राज ठाकरे ने दिया साथ
विधानसभा में विपक्ष के नेता विनोद तावड़े ने बताया कि राज ठाकरे ने भाजपा का साथ इसलिए दिया है, क्योंकि वह अपना संगठन खड़ा नहीं कर पा रहे थे।
गौरतलब है कि पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने हाल ही में राज ठाकरे से मुलाकात की थी। इसके बाद ठाकरे ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी का समर्थन किया और भाजपा के खिलाफ प्रत्याशी न खड़ा करने का एलान किया।
खबर यह भी है कि लंबे समय से भाजपा के साथी रहे शिव सेना के नेता भी भाजपा की इस चाल से खफा रहे। कुछ लोगों ने इसे पीठ में छूरा भोंकने का नाम दिया तो कुछ ने इसे धोखा कहा।
एक शिव सेना नेता ने कहा, 'भाजपा हमारे साथ गठबंधन में है, फिर भी वे एक ऐसी पार्टी के साथ बात करते हैं जो हमारी विरोधी है। उसके बाद, वह पार्टी कहती है कि वो भाजपा के खिलाफ तो प्रत्याशी नहीं उतारेंगे लेकिन हमारे खिलाफ उतारेंगे। ऐसे में, हम भाजपा के साथ गठबंधन में कर क्या रहे हैं?'
इस पूरे मामले पर भजपा प्रवक्ता डॉ. मनोज मिश्र से बात हुई तो उनका कहना है कि भाजपा की ओर से राज ठाकरे को अप्रोच नहीं किया गया था।
मिश्र के मुताबिक, क्योंकि इस वक्त पूरा देश नमो-नमो कर रहा है इसीलिए राज ठाकरे ने भी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए हमारे खिलाफ प्रत्याशी खड़ा न करने का फैसला लिया है।
उन्होंने यह बात भी दोहराई कि भाजपा का शिव सेना के साथ ही गठबंधन रहा है और वही बना रहेगा। रमापति राम त्रिपाठी की कथित आपत्ति पर उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।