प्रदेश की 19 फीसदी मुस्लिम आबादी के लिए सपा-बसपा गठबंधन पहली पसंद हो सकता है। हालांकि, जिन सीटों पर कांग्रेस मजबूत स्थिति में होगी वहां वोटों का बंटवारा भी हो सकता है। इन सीटों पर उन्हें तय करना होगा कि गठबंधन और कांग्रेस में किसे चुने?
सपा-बसपा दोनों ही दल मुस्लिमों को अपना वोट बैंक मानते रहे हैं। प्रदेश में लगभग डेढ़ दर्जन सीटों पर मुस्लिमों का रुझान चुनावी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाता है। इनमें ज्यादातर जिले पश्चिमी यूपी में हैं।
रामपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, नगीना, सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बरेली, बहराइच समेत कई सीटों पर मुस्लिमों की आबादी काफी ज्यादा है। कांग्रेस के गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने की स्थिति में यहां त्रिकोणात्मक चुुनाव होने की संभावना है। इन सीटों पर मुस्लिम मन का आकलन करना आसान नहीं होगा।