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UP: जीएसटी के जांच अधिकारियों पर कोर्ट ने की गंभीर टिप्प्णी, कहा- पुख्ता सुबूत होने पर ही गिरफ्तार करें

Fri, 31 May 2024 02:56 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीएसटी विंग के कामकाज पर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि कामकाज का तरीका सुधारें और बिना ठोस सुबूत के गिरफ्तारी नहीं करें।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीएसटी अधिकारियों की जांच की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और रमेश डोनादी की बेंच ने गैलेंट इस्पात लि. के मामले की सुनवाई के बाद जीएसटी की जांच विंग को कामकाज की शैली सुधारने के आदेश दिए। कहा कि जांच अधिकारी मौके पर पैसा जमा नहीं कराएंगे और पुख्ता सुबूत होने पर ही कारोबारी को गिरफ्तार किया जाए। व्यापारियों और उद्यमियों को राहत देने वाले ऐसे कुल छह आदेश हाईकोर्ट ने जीएसटी की जांच विंग को दिए हैं।

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दरअसल, जीएसटी में गिरफ्तारी का प्रावधान आने के बाद विंग के पास तमाम अधिकार आ गए हैं। खासतौर पर डीजीजीआई व अन्य जांच विंग इन अधिकारों के तहत ज्यादा गिरफ्तारी करती हैं। इसी तरह बिना ठोस प्रमाण के थोक के भाव सम्मन भेजे जा रहे हैं। कारोबारियों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। ऐसे ही मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कई आदेश जीएसटी की जांच विंग को दिए।

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हाईकोर्ट ने दिए ये आदेश
1-जांच अधिकारी ऑन द स्पाट पैसा जमा नहीं कराएंगे। आमतौर पर मौके पर ही कारोबारी से पैसा जमा कराने का दबाव डाला जाता है। इसी पर उनका सारा जोर होता है।
2- शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को जानकारी देने के लिए बुलाने के सम्मन जारी नहीं होंगे।
3- जो सम्मन जारी होते हैं। जीएसटी जांच और जीएसटी चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल सम्मन में जहां तक संभव हो, नहीं किया जाएगा।
4 -किसी भी फिशिंग और रोमिंग सूचना के आधार पर सम्मन जारी नहीं होंगे। यानी पुख्ता प्रमाण और जानकारी के बगैर सम्मन नहीं दिया जाएगा।
5- जांच की कार्यवाही एक साल के अंदर खत्म करनी होगी। अभी तक डीजीजीआई कई मामलों में तीन से पांच साल तक केस चलाता है।
6- जबतक बहुत गंभीर और पुख्ता सुबूत न हों, कारोबारी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

जीएसटी एक्सपर्ट वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र डंग का कहना है कि हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी के बाद जीएसटी विभाग के जांच अधिकारियों को कार्यप्रणाली में बदलाव लाना चाहिए। हाइकोर्ट के आदेश से उन कारोबारियों को राहत मिलेगी, जो जांच के दायरे में हैं।

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