इन्वेस्टर्स समिट के दौरान हुए सजावट में घपले के आरोपी तत्कालीन उद्यान अधीक्षक धर्मपाल यादव और लेखाकार बृज किशोर पाठक को निलंबित कर दिया गया है। वहीं तीसरे आरोपी उद्यान प्रभारी संजय राठी को भी सस्पेंड करने के आदेश निदेशक उद्यान को दे दिए गए हैं। तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी दे दिए गए हैं। शासन ने धर्मपाल यादव को उप निदेशक के वर्तमान पद से डिमोट करने का आदेश भी दिया, पर पदावनति आदेश पर उन्हें कोर्ट से स्टे मिल गया है। यहां बता दें कि इस घपले को अमर उजाला ने लगातार प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
पिछले साल फरवरी में हुई इन्वेस्टर्स समिट में कार्यक्रम स्थल इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान और राजधानी में फूलों से सजावट की जिम्मेदारी उद्यान विभाग को सौंपी गई थी। इसमें घपले की शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एपीसी प्रभात कुमार को जांच कराने के आदेश दिए थे। एपीसी ने इस मामले की जांच के लिए पीसीएफ के एमडी प्रमोद उपाध्याय और निदेशक, वित्त आलोक अग्रवाल की कमेटी गठित की। इस कमेटी ने 39 पेज की अपनी रिपोर्ट शासन को दी। रिपोर्ट में निष्कर्ष के तौर पर कुल 85 लाख 54 हजार 26 रुपये की शासकीय क्षति बताई गई। बताया गया कि मनमाने ढंग से चहेतों को सजावट का ठेका दे दिया गया। गमले भी बाजार दर से कहीं ज्यादा रेट पर खरीदे गए।
यहां बता दें कि इन्वेस्टर्स समिट में कुल 2 करोड़ 48 लाख 197 रुपये का खर्च दिखाया गया। इसमें से 1 करोड़ 51 लाख 91 हजार 815 रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि घपले की शिकायतें मिलने पर 96 लाख 10 हजार 158 रुपये का भुगतान रोक दिया गया था।
मनमर्जी से किया गया भुगतान
शासन से जारी आदेश में कहा गया है, ‘तत्कालीन अधीक्षक और उनके अधीनस्थ कार्मिकों द्वारा कोटेशन में इच्छित एवं मिलीभगत करके मनमानी दरों पर कार्य किया गया। जांच आख्या के बाद यह पाया गया कि टेंडर कोटेशन में हर कार्य के लिए विशिष्टताओं का निर्धारण न करके एक समान शर्तें रखी गईं। सामग्री के क्रय की भुगतान की कोई प्राथमिकता निर्धारित नहीं की गई और मनमर्जी भुगतान किया गया। बाजार दर से अधिक दरों तथा आवश्यकता से अधिक सामग्री की खरीद क्रय में पूर्णत: अपारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई।
इन आरोपों में तत्कालीन उद्यान अधीक्षक व बाद में प्रमोशन पाकर सहारनपुर के उप निदेशक, उद्यान बने धर्मपाल यादव और लेखाकार बृज किशोर पाठक को सस्पेंड कर दिया गया है। प्रमुख सचिव, उद्यान सुधीर गर्ग ने धर्मपाल यादव को उप निदेशक से जिला उद्यान अधिकारी श्रेणी-2, ग्रेड-1 के पद पर पदावनत करने और ग्रेड वेतन 6600 से 5400 रुपये करने का आदेश दिए। लेकिन, निदेशक उद्यान आरपी सिंह ने बताया कि पदावनति आदेश के खिलाफ धर्मपाल यादव कोर्ट गए थे, जहां से उन्हें इस बिंदु पर स्टे मिल गया है। सिंह ने बताया कि शासन से उद्यान प्रभारी संजय राठी को भी निलंबित करने का आदेश मिला है। इस पर सोमवार को अमल कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग से लेखाकार बृज किशोर पाठक को निलंबित किए जाने का पत्र भी उद्यान विभाग को मिल चुका है।
एफआईआर पर न्याय विभाग से मांगी राय
उद्यान निदेशक आरपी सिंह ने बताया कि शासन ने तीनों कार्मिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। नियमानुसार, इस बारे में शासन के न्याय विभाग से राय मांगी गई है। जानकारों का कहना है कि कार्यवाही के आदेश सीएम ने दिए हैं, इसलिए शासन से अनुमति मिलना तय है। एफआईआर दर्ज होते ही तीनों को जेल भी होगी।
पर्यवेक्षणीय दायित्यों का निर्वहन न करने पर जवाब-तलब
इस प्रकरण में वित्त नियंत्रक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग जय मंगल राव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पर्यवेक्षणीय दायित्वों का निर्वहन न करने पर तत्कालीन उप निदेशक उद्यान वाहिद अली से भी जवाब-तलब किया गया है।
अब नहीं किया जाएगा कोई भुगतान
इन्वेस्टर्स समिटि में 96 लाख 10 हजार 158 रुपये की देयता अभी बाकी है। शिकायत मिलने पर वन एवं उद्यान मंत्री दारा सिंह चौहान ने इसके भुगतान पर रोक लगा दी थी। शासन ने अवशेष देयता को शून्य माने जाने और इसका भुगतान न करने का आदेश भी उद्यान निदेशालय को दिया है।