बीबीएयू के विधि विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता।
लखनऊ। जहां भी उच्च शिक्षण संस्थानों में कानून की पढ़ाई हो रही है, वहां मूट कोर्ट (काल्पनिक अदालत) की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। इससे लॉ के विद्यार्थी व्यवहारिक अनुभव के साथ बेहतर और कुशल अधिवक्ता बन सकेंगे। विद्यार्थियों में न केवल व्यावहारिक ज्ञान बढ़ेगा, बल्कि कानून की गहरी समझ भी विकसित होगी। यह बातें प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहीं।
मौका था शुक्रवार को बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के विधि विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर का। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं में कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का अनुभवी अधिवक्ताओं से संवाद भी होना चाहिए, जिससे उन्हें वास्तविक कानूनी प्रक्रियाओं की समझ मिल सके।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरके मित्तल ने कहा कि विधि के विद्यार्थियों को सभी अधिनियमों, कानूनों और समय-समय पर होने वाले परिवर्तनों की समुचित जानकारी होनी चाहिए। साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि पुस्तक आधारित ज्ञान को व्यावहारिक जीवन में किस प्रकार प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
वहीं डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह ने कहा कि कानून के क्षेत्र में कार्य करते समय संवैधानिक नैतिकता को केंद्र में रखना आवश्यक है। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि विद्यार्थियों और पेशेवरों को समस्याओं को गहराई से समझकर उनके समाधान खोजने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
कार्यक्रम में विधि अध्ययन विद्यापीठ के संकायाध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार चढ्ढा, डॉ. सूफिया अहमद, डॉ. अनीस अहमद, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. बृजेश कुमार यादव, डॉ. विष्णु पति त्रिपाठी, डॉ. गर्गी वोहरा सहित अनेक शिक्षकगण उपस्थित रहे।