ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक पर पाबंदी लगाने वाले मुस्लिम महिला बिल 2017 में सुधार किए बिना लोकसभा से पारित कराए जाने को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। बोर्ड ने साफ किया कि बिल में सुधार के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि जब सरकार मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के प्रति संजीदा है तो बिल पारित कराने में जल्दबाजी क्यों कर रही है। बोर्ड बिल को पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मूल भावना के खिलाफ बता चुका है। साथ ही इसे शरीयत में दखलंदाजी मानता है।
बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी ने कहा कि बिल में तमाम खामियां हैं। मौजूदा हालात में इसे मंजूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे शादीशुदा मुस्लिम महिलाओं को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए कहा कि इसे लोकसभा की स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाए ताकि इसमें सुधार किया जा सके।
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नहीं मिल पाएगी महिलाओं को राहत
मुसिलम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी ने कहा कि जब पुरुष जेल ही चला जाएगा तो वो महिला को गुजारे के तौर पर मदद कैसे दे पाएगा। बिल के मुताबिक कोई अनजान व्यक्ति भी तीन तलाक की शिकायत कर सकता है, इसमें पत्नी की शिकायत जरूरी नहीं है। ऐसे में परिवार पूरी तरह से टूट जाएंगे और सुलह की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी।
तीन तलाक पर हो 10 साल की सजा : शिया वक्फ बोर्ड
तीन तलाक
- फोटो : amar ujala
शिया वक्फ बोर्ड एक साथ तीन तलाक के खिलाफ है। बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेज कर इसे लेकर बनने वाले कानून में 10 साल की सजा का प्रावधान रखने का अनुरोध किया है।
पत्र में वसीम रिजवी ने कहा, एक बार में तीन तलाक बोलने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए। ऐसे कृत्य के लिए कम से कम 10 साल के कठोर कारावास का प्रावधान होना चाहिए।
उन्होंने इसे महिलाओं के शोषण से जोड़ते हुए कहा कि पीड़ित महिला जिन्दगी भर अपने बचे हुए जीवन में संघर्ष करती रहती है। समाज में भी उसे सम्मान नहीं मिलता। उन्होंने तीन तलाक को शरियत के खिलाफ भी बताया।
कहा, इसे धार्मिक कानून के तहत मानना उचित नहीं है। इसे भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध होना चाहिए। उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के विरोध को महिलाओं के प्रति अन्याय करार दिया।
मुस्लिम महिलाओं ने केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा किया
एक-दूसरे को मिठाई खिलातीं महिलाएं
- फोटो : amar ujala
लोकसभा में तीन तलाक का विधेयक पारित करने पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की महिलाओं ने केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा किया। हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष एकत्र हुई मंच से जुड़ी महिलाओं की अगुवाई करते हुए मंच की अवध प्रांत की संयोजिका डॉ. शबाना आजमी ने लोकसभा में बिल पेश किये जाने पर खुशी जताई। कहा कि तीन तलाक का कानून बनने के बाद महिलाओं को उनके अधिकार मिल जाएंगे। इस मौके पर डॉ. रिजवाना, शालिनी, हुमा खान, फरजाना, तुलसी, आयशा, एमन मौजूद रहीं।
परिवार जोड़ने का हो मकसद
वहीं, इस मामले पर ऑल इंडिया महिला मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर का कहना है कि एक साथ तीन तलाक के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पति को सीधे जेल नहीं भेजा जाना चाहिए। दोबारा इस तरह की गलती करने पर पति को जेल भेजा जाना चाहिए। इससे परिवार टूटने से बच जाएंगे। हमारा मकसद परिवार जोड़ने का होना चाहिए, तोड़ने का नहीं। 1986 के मेंटेनेंस एक्ट के मुताबिक पत्नी को मदद का प्रावधान रखा जाना चाहिए।
बज्म-ए-ख्वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत का कहना है कि तलाक के बाद महिलाओं को गुजारे के लिए सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। हमारी लड़ाई तलाकशुदा महिलाओं की आर्थिक मदद को लेकर है। शौहर के मन में यह डर होना जरूरी है कि पत्नी को बेवजह तलाक देने पर सजा हो सकती है। हालांकि एक साथ तीन तलाक की शिकायत पर ही जेल भेज देना ठीक नहीं है। गिरफ्तारी से पहले जांच की जाए ताकि कानून का बेजा इस्तेमाल न होने पाए।
मध्यस्थता का खत्म न हो रास्ता
मुस्लिम वीमेन लीग की महासचिव नाईश हसन ने इस फैसले पर कहा कि तीन तलाक के खिलाफ कानून बनना जरूरी है लेकिन मध्यस्थता का रास्ता बंद नहीं किया जाना चाहिए। बिल में तीसरे व्यक्ति की शिकायत पर पति को जेल भेजने का प्रावधान खत्म करना होगा ताकि दहेज एक्ट की तरह इसका गलत इस्तेमाल न होने पाए। समाज से कोई भी चीज अचानक समाप्त नहीं होती। कानून बनने से सती प्रथा की तरह ट्रिपल तलाक भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा।