लखनऊ। मदरसा दारुल मुबल्लिगीन के अध्यापक कारी मोहम्मद सिद्दीक ने कहा कि शब-ए-बरात में इबादत करने वालों के लिए जन्नत के सभी दरवाजे खोल दिए जाते हैं। बुधवार को वह शब-ए-बरात की पूर्व संध्या पर आयोजित जलसे को खिताब कर रहे थे।
पाटानाला स्थित मस्जिद सुब्हानिया शब-ए-बरात की फजीलत पर आयोजित जलसे में कारी मोहम्मद सिद्दीक ने कहा कि इस्लामिक माह शाबान की 14 और 15 तारीख की रात शब-ए-बरात है। इसका मतलब गुनाहों से निजात की रात है। कारी सिद्दीक ने कहा शब-ए-बरात में अल्लाह पाक अपने बंदों के मुकद्दर का फैसला करते हैं। इसी मुबारक रात में रसूल अल्लाह के उम्मतियों के साल भर के आमाल पेश किए जाते हैं और बंदों को रिज्क दिया जाता है। इस पूरी रात में इबादत करने के बाद सुबह 15 शाबान को एक रोजा रखना अफजल है। गुफरान अहमद खान की अध्यक्षता में आयोजित जलसे का आगाज कारी अबदुस्समद ने कुरान पाक की तिलावत से किया।