बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा तो अरसे से लटकी विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठक हो गई और कई अफसर आईजी से एडीजी बन गए।
साथ ही जो डीआईजी से आईजी बने थे, वह भी सक्रिय हो गए। कारण साफ है, आईजी की भी कुछ महत्वपूर्ण पोस्टिंग हैं, जिन्हें अफसर पाना चाहते हैं और एडीजी की भी। ऐसे में सभी ने अपना जोर आजमाना शुरू कर दिया है।
पिछले कुछ दिनों से ऐसे कई अधिकारियों की सक्रियता सचिवालय के गलियारों, पंचम तल और विक्रमादित्य मार्ग पर दिखाई देने लगी है।
आईजी से एडीजी बनने वालों में एक अफसर ऐसे हैं जिनकी खासी ऊंची पहुंच बताई जाती है, यह अफसर अपनी इसी पहुंच से आश्वस्त हैं कि उन्हें उनकी मनचाही तैनाती मिलेगी।
लेकिन उनके द्वारा खाली की जाने वाली पोस्ट के कई दावेदार हो गए हैं। इन्हीं दावेदारों की सत्ता के गलियारे में कदमताल तेज हो गई है।