वित्त विभाग से जुड़े अफसरों के कारनामे भी अजब-गजब हैं। उनके पास कोई भी जाए, सबको एक तराजू में तौलते हैं।
बात उस समय की है, जब माननीयों को भी ट्रेजरी से कैश में वेतन मिलता था। ऐसे ही एक माननीय हैं जिन्होंने वित्त विभाग से जुड़े अधिकारियों के एक जलसे में उन्हें आईना दिखाया।
अपने पुराने समय को याद करते हुए उन्होंने कहा हैं कि तब तो ट्रेजरी वाले वेतन देने के वक्त भी कुछ न कुछ मांग लेते थे। कहते, सब कुछ खुद ही ले लेंगे या कुछ हमको भी देंगे...।
अगर कुछ न मिला तो छोटे-मोटे ऑब्जेक्शन लगाकर 10-12 दिन दौड़ा देते थे। धन्य हो जो कम्प्यूटर का युग आ गया।
आजकल तो वेतन ऑनलाइन खाते में चला जाता है। माननीय के संस्मरण सुन वित्त विभाग के कई अफसर झेंपे तो कुछ अपनी हंसी रोक न पाए।