राजधानी में एक पार्क पर कब्जे को लेकर चर्चा में आए अवध क्षेत्र के एक बाहुबली नेता को सत्ताधारी दल ने अपना प्रत्याशी बनाया है।
रमजान में बिरयानी खिलाकर कस्बा, बाजार तक एक वर्ग को रिझाने की चाल चली। मगर बकरे, मुर्गे की पेशगी तमाम दूसरे लोगों को खल गई।
सियासत की नब्ज से वाकिफ नेता को अपनी चूक का अंदाजा लगाते देर नहीं लगी कि इस फॉर्मूले से सीट निकलने के बजाय फंसनी तय है।
नेताजी के एक राजदार फरमाते हैं कि तत्काल दूसरे लोगों का गुस्सा थामने के लिए बेटवा को तीज पर बोलबम के लिए दौड़ा दिया।
करीब 42 किलोमीटर लंबी सियासी कांवड़ यात्रा को एक वर्ग जहां नेता के शुद्धीकरण की शुरुआत बता रहा है, तो उनके साथी बेटवा की सियासत में लॉन्चिग का एक नया फॉर्मूला।
मगर नेताजी के पुराने सियासी संबंधियों से संपर्क की खबरों के बीच सत्ताधारी दल के कई लोगों को दाल में कुछ काला नजर आने लगा है।
उनकी हर गतिविधि पर सूचना तंत्र चौकस कर दिया गया है। राजदार फरमाते हैं कि अवध में जल्द सियासी गर्माहट पैदा होने के संकेत हैं।