‘मैं एक चेहरा बनाना चाहता हूं, पर अधूरा रह जाता है...’ यह पंक्तियां रविवार को कवि सुभाष राय ने जयशंकर सभागार में आयोजित सृजन समीक्षा गोष्ठी में सुनाई, जिसका आयोजन माध्यम साहित्यिक संस्था की ओर से किया गया।
इसके बाद उन्होंने ‘मैं नदी हूं’, ‘मुझसे तुम रचो...’ और ‘इतिहास के अनुत्तरित प्रश्न...’ कविता सुनाई।
गोष्ठी के दूसरे चरण की अध्यक्षता गोपाल चतुर्वेदी ने की। जन्मेजय अवस्थी ने ‘गीतों में पीड़ा गाते हैं, शब्दों से भाव सजाते हैं...’ सुनाया।
संदीप कुमार सिंह ने राजनीति पर कटाक्ष करने वाली पंक्तियां सुनाईं।