आईएएस और आईपीएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के सरकारी अंदाज से बड़े-बड़े अफसर सकते में हैं।
सरकार के चहेते एक वरिष्ठ आईएएस बताते हैं कि राहत का काम देख रहे एक आईएएस की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहज भाव से कही गई बात को तूल दिए जाने की वजह से सरकार ने निलंबित कर दिया।
कुछ दिन बाद बहाल भी कर दिया। एक आईएएस एसडीएम को निलंबित करने के बाद बहाली के लिए सरकार को जिस तरह के खेल करने पड़े, हर किसी ने देखा।
मामले की जांच बैठाने के बाद बिना जांच पूरी कराए एसडीएम की बहाली से लोगों को पता चल गया कि कौन सही था- अफसर या सरकार। ताजा मामला मातहतों की धुनाई करने वाले एक आईपीएस का है।
पहले तो उन्हें निलंबित किया गया, फिर जांच शुरू होने से पहले ही बहाल कर बढ़िया पोस्टिंग दे दी गई। पता ही नहीं चल रहा सरकार इस तरह निलंबन व बहाली से किसे और क्या मैसेज देना चाहती है?
बेजार अफसर ने बताया कि पिछले दिनों वे बुंदेलखंड के एक जिले के भ्रमण पर थे। जिले के कलेक्टर ने बताया कि एक वरिष्ठ मंत्री उसे बार-बार ‘भय बिनु होई न प्रीति’ वाली लाइन सुना रहे हैं? बता रहे हैं कि ठीक से काम न करने वाले के लिए उनकी सरकार का यही फॉर्मूला है।