सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट विवेकाधीन शक्तियां कम करने का निर्देश देते
रहे हैं। सरकार के राजस्व जैसे विभाग अपने नियमों में बदलाव कर ऐसे
निर्देशों का पालन भी कर रहे हैं।
मगर ग्राम्य विकास, पंचायती राज और समाज
कल्याण जैसे विभागों ने समूह ‘ग’ की भर्तियों में शैक्षिक रिकार्ड के बराबर
इंटरव्यू को दम देकर सवालों को हवा दे दी है। युवाओं में ऐसी भर्ती पर
सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश में इस समय
ग्राम पंचायत अधिकारी (पंचायत सचिव), ग्राम विकास अधिकारी (ग्राम सेवक) और
ग्राम विकास अधिकारी (समाज कल्याण) जैसे पदों पर भर्तियां चल रही हैं। इसके
लिए विज्ञापन निकाले जा चुके हैं।
राजस्व विभाग लेखपाल पद पर भर्ती की
तैयारी कर रहा है। सचिव, ग्राम सेवक जैसे पदों पर भर्ती के लिए जहां 100
नंबर की मेरिट में 50 नंबर शैक्षिक व अन्य रिकार्ड के लिए तय किए गए हैं
वहीं 50 नंबर साक्षात्कार का होगा।
यानी 50 नंबर के शैक्षिक रिकार्ड में
अभ्यर्थी यदि 45 नंबर भी पाता है तो भी वह अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित
रहेगा। वजह, 50 नंबर के शैक्षिक व अन्य रिकार्ड में 20 नंबर भी पाने वाला
इंटरव्यू में 50 नंबर हासिल कर उसे पीछे छोड़ सकता है।
तीन भागों में बंटा नंबर
और वह शैक्षिक
रिकार्ड में 45 नंबर पाने के बावजूद यदि इंटरव्यू में चयन समिति के सदस्यों
को अपने व्यक्तित्व व अभिव्यक्ति क्षमता से प्रभावित न कर सका तो फिर उसका
नौकरी की होड़ से बाहर होना तय है।
दिलचस्प पहलू यह है कि 50 नंबर के साक्षात्कार के नंबर को तीन हिस्सों में
बांटा गया है। इसमें 10 अंक सामान्य ज्ञान के होंगे जिनके सवाल और जवाब से
नंबर की मार्किंग की जा सकेगी।
बाकी 20-20 नंबर व्यक्तित्व निर्धारण और
अभिव्यक्ति क्षमता का होगा जो चयन समिति के सदस्यों के विवेक से तय होगा।
इस पर किसी तरह का सवाल नहीं उठाया जा सकता। संकेत साफ है कि आम छात्रों के
लिए यह साक्षात्कार बेहद कठिन साबित होने वाला है।
राजस्व विभाग ने सुधारे नियमराजस्व
विभाग में भी लेखपाल के लिए शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट है। यहां इस पद पर
भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षा कराई जाती है। पहले यहां 60 नंबर की लिखित
परीक्षा और 40 नंबर का इंटरव्यू होता था।
पिछली सरकार में इस आधार पर जब
भर्ती का विज्ञापन निकाला गया तो इसे कोर्ट में चुनौती दी गई। अधिकारी
बताते हैं कि हाईकोर्ट ने 40 नंबर के विज्ञापन को गलत ठहराते हुए इंटरव्यू
10 नंबर करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद राजस्व विभाग को अपने नियम में
बदलाव करना पड़ा। 2010 में नियम बदल कर 90 नंबर की लिखित परीक्षा और 10 का
इंटरव्यू कर दिया गया। लेखपाल परीक्षा इसी आधार पर होने जा रही है।
यह भी है पेंचछात्रों
के सामने चुनौती सिर्फ साक्षात्कार के नंबर ही नहीं बनेंगे। एक पद के
सापेक्ष कितने अभ्यर्थी बुलाए जाएंगे यह तय करना चयन समिति के विवेक पर
छोड़ दिया गया है।
पहले एक रिक्त सीट के लिए अधिकतम दस अभ्यर्थियों को ही
बुलाने का प्रावधान था। अगस्त 2007 में यह बदलाव कर दिया गया कि चयन समिति यह फैसला लेगी।