कोटे को लेकर नामित और निर्वाचित पार्षदों के बीच विवाद गहराने
लगा है। निर्वाचित पार्षदों (सपा को छोड़कर) के विरोध के कारण कोटा न मिलने
नाराज नामित पार्षद अब इस मामले को न्यायालय ले जाने की तैयारी मे हैं।
उनका कहना है कि निर्वाचित पार्षदों को कोटा मिले, इसकी व्यवस्था नगर निगम
अधिनियम में नहीं है, इसलिए इनको भी कोटा नहीं मिलना चाहिए।
नगर
निगम अधिनियम में की गई व्यवस्था के तहत शासन 10 पार्षदों को नामित कर
सकता है। शासन की ओर से करीब दो महीना पहले नौ पार्षद नामित किए गए हैं। यह
पार्षद भी निर्वाचित पार्षदों की तरह विकास कार्य कराने के लिए कोटा दिए
जाने की मांग कर रहे थे।
जिसको लेकर रविवार को हुई सदन की बैठक में
प्रस्ताव भी लाया गया। जिसे कांग्रेस, भाजपा व बसपा के निर्वाचित पार्षदों के विरोध के कारण पास नहीं किया जा सका। नामित
पार्षद शोएब अहमद का कहना है कि जिस तरह से निर्वाचित पार्षदों को वार्ड
विकास संस्तुति राशि दी जाती है उसी तरह नामित पार्षद को मिलनी चाहिए।
नामित पार्षदों का कोई एक वार्ड नहीं है इसलिए प्रस्ताव में वार्डों के
विकास निधि की मांग की गई थी ताकि किसी एक वार्ड की बजाए उससे किसी भी
वार्ड में विकास कार्य कराया जा सके।
इनका कहना है कि राज्यसभा और
विधानपरिषद में भी मनोनीत सदस्य कोटा दिया जाता है। वहां पर कोई भेदभाव
नहीं किया जाता। ऐसे में नगर निगम में नामितों में भी विकास कार्य केलिए
निधि दी जाए।
इनका यह भी कहना है कि निर्वाचित पार्षदों ने तर्क दिया है कि
उनको कोटा नहीं मिलता उनके प्रस्ताव पर वार्ड विकास संस्तुति राशि से कार्य
कराया जाता तो फिर नामितों को इसका हक देने में क्या हर्ज है। नामित भी तो
वार्ड में ही विकास कराना चाहते हैं।